उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले की गोला विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने पूरी की पूरी सरकार उतार दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर उत्तर प्रदेश के दोनों उपमुख्यमंत्री और कैबिनेट के तमाम मंत्रियों समेत संगठन के बड़े पदाधिकारियों को स्टार प्रचारक बनाया गया है। गोला विधानसभा का यह उपचुनाव वहां के स्थानीय विधायक की मृत्यु के बाद हो रहा है। जिसमें विधायक के बेटे को प्रत्याशी बनाया गया है। सहानुभूति की लहर में होने वाले इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी की पूरी सरकार के उतरने के राजनैतिक मायनों को सियासी गलियारों में अलग-अलग नजरिए से देखा जा रहा है। कहा जा रहा है कि इस चुनाव के माध्यम से भाजपा ने 2024 के लोकसभा चुनावों की जमीन तैयार करने के लिहाज से मनोवैज्ञानिक तौर पर कई तरह के संदेश देने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंकी है।
लखीमपुर खीरी जिले की गोला विधानसभा में तीन नवंबर को उपचुनाव होना है। यहां के स्थानीय विधायक रहे अरविंद गिरी की मृत्यु के बाद यह सीट खाली हुई थी। भाजपा ने उनके बेटे अमन गिरी को चुनावी मैदान में उतारा है। भारतीय जनता पार्टी से ताल्लुक रखने वाले लखीमपुर खीरी के वरिष्ठ नेता कहते हैं कि गोला का विधानसभा चुनाव पूरी तरीके से सहानुभूति की लहर में चल रहा है। हालांकि यह बात अलग है भारतीय जनता पार्टी की तरह समाजवादी पार्टी ने भी अपनी पूरी ताकत गोला के उपचुनाव में लगा दी है। समाजवादी पार्टी ने गोला विधानसभा के उपचुनाव में अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से लेकर प्रदेश अध्यक्ष और तमाम पूर्व मंत्रियों और वर्तमान विधायकों को जमीन पर उतार दिया है। उपचुनाव में दो प्रमुख पार्टियों के नेताओं का इतना बड़ा हुजूम पूरे विधानसभा समेत जिले में न सिर्फ चर्चा का विषय बना हुआ है बल्कि उसको लेकर तमाम तरह की राजनीति कयास बाजी भी की जा रही है।
राजनीतिक विश्लेषक अरुणेंद्र प्रताप सिंह कहते हैं कि उपचुनाव को कौन संगठन कितना सीरियस लेता है यह तो उनकी अपनी पॉलिसी का हिस्सा है। सिंह कहते हैं कि कई राजनीतिक पार्टियां उपचुनाव में इंटरेस्ट नहीं लेती हैं जबकि कुछ अपनी पूरी ताकत लगा देती हैं। वह कहते हैं कि जो चुनाव सहानुभूति के आधार पर होते हैं अमूमन उसमें बहुत ज्यादा राजनैतिक ताकत झोंकने की जरूरत नहीं होती है। लेकिन यह निर्भर उस उपचुनाव पर करता है कि वहां पर प्रत्याशी कौन उतारा गया है। राजनीतिक विश्लेषक एसएम पवार मानते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने अगर गोला विधानसभा में अपनी पूरी सरकार उतारी है तो उसका मतलब सिर्फ गोला विधानसभा का उपचुनाव ही नहीं है। बल्कि इसके कई संदेश स्पष्ट तौर पर निकाले जा रहे हैं। खासतौर से बीते कुछ समय में जिस तरीके से लखीमपुर खीरी चर्चाओं में रहा है उससे यहां पर होने वाले उपचुनाव का परिणाम बड़ा संदेश देगा। वो कहते हैं कि भारतीय जनता पार्टी किसी भी कीमत पर इस उपचुनाव में कोई कोर कसर बाकी नहीं रखना चाहती है।
लखीमपुर खीरी की प्रगतिशील किसान मोर्चा से जुड़े किसान लखविंदर सिंह कहते हैं कि गोला के इस उपचुनाव का परिणाम सिर्फ लखीमपुर ही नहीं बल्कि आसपास के जिलों जिसमें शाहजहांपुर, पीलीभीत, सीतापुर, बहराइच, बरेली समेत तराई के जिलों की 100 से ज्यादा विधानसभा सीटों पर असर डालेगी। जिसका असर कुछ समय बाद होने वाले लोकसभा के चुनावों पर सीधा पड़ने वाला है। राजनीतिक विश्लेषक हरि ओम त्रिपाठी बताते हैं कि भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरीके से अपनी सरकार के बड़े ओहदेदारो को गोला के उपचुनाव में जमीन पर उतारा है वह एक तरीके से मनोवैज्ञानिक तौर पर लोगों में यह संदेश देने के लिए है कि चुनाव भले सहानुभूति के आधार पर हो लेकिन मुख्यमंत्री से लेकर उपमुख्यमंत्री और सभी बड़े नेता हर चुनाव को गंभीरता से लेते हैं। और वह उपचुनाव में भी उसी तरीके से चुनावी मैदान में है जितना कि सामान्य चुनावों के दौरान होता है। इसके अलावा भारतीय जनता पार्टी इस उपचुनाव के माध्यम से 2024 के लोकसभा चुनावों तराई के इलाकों से अपनी मजबूत नीव की आधारशिला रख रही है। हालांकि वह कहते हैं कि सिर्फ भारतीय जनता पार्टी नहीं नहीं बल्कि समाजवादी पार्टी इसी रणनीति को अपनाते हुए इस उपचुनाव में अपने तमाम स्टार प्रचारकों को मैदान में उतार दिया है।
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी कहते हैं कि उनके लिए कोई भी चुनाव छोटा या बड़ा नहीं होता है। चुनाव चाहे सामान्य विधानसभा के हों या उपचुनाव के। उनकी पार्टी हमेशा बूथ मैनेजमेंट के आधार पर ही चुनावी मैदान में उतरती है। त्रिपाठी कहते हैं चुनाव चाहे पंचायत का हो या विधानसभा या लोकसभा का। भारतीय जनता पार्टी हर चुनाव को न सिर्फ गंभीरता से लेती है बल्कि उतनी गंभीरता के साथ अपने सभी नेताओं को मैदान में उतारती है। यही वजह है कि पार्टी गोला के उपचुनाव में अपनी पूरी ताकत के साथ मैदान में डटी हुई है।