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गर्भावस्था में चूल्हे के इस्तेमाल से नवजात में आ सकती है विकृति, एम्स के अध्ययन में खुलासा

Mon, 11 Feb 2019 06:08 AM IST
Gaurav Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • एम्स के सीडीईआर के अध्ययन में सामने आई सच्चाई      
  • 2010 से चार अस्पतालों के साथ मिलकर चल रहा है अध्ययन
  • तीन में से दो चरण पूरे होने के बाद डॉक्टरों ने जताई चिंता
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विस्तार
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गर्भावस्था के दौरान चूल्हे पर खाना बनाना नवजात शिशु के लिए महंगा साबित हो सकता है। जन्म के बाद नवजात एक ऐसी विकृति का शिकार हो सकता है, जिसमें उसके होंठ कटे हो सकते हैं। देश में सालाना ऐसे करीब 35 हजार से ज्यादा शिशु जन्म भी ले रहे हैं। एम्स के दंत चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान (सीडीईआर) के अध्ययन में ये खुलासा हुआ है कि गर्भावस्था के दौरान चूल्हे से निकलने वाले धुएं में सांस लेना, शराब और बीड़ी-सिगरेट का सेवन, ज्यादा दवाएं लेना या किसी तरह का रेडिएशन नवजात शिशु के चेहरे पर विकृति ला सकता है।

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वर्ष 2010 में शुरू हुआ ये अध्ययन तीन में से दो चरण पूरे कर चुका है। एम्स, सफदरजंग, मेदांता अस्पताल के डॉक्टर इस अध्ययन को कर रहे हैं। एम्स के विशेषज्ञों ने दावा किया कि फिलहाल अभी भारत में इससे जुड़े आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन देश के अलग-अलग हिस्से में हुए कई अध्ययन यह पुष्टि करते हैं कि होंठ कटे होने के कई मामले सामने आते रहे हैं। अनुमान है कि भारत में हर साल करीब 35 हजार ऐसे नए मामले सामने आते हैं। अनुमान यह भी है कि एशियाई नवजात शिशुओं में प्रति हजार में से 1.7 शिशु कटे होंठ के शिकार होते हैं।

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2010 से अब तक चल रहा है अध्ययन

एम्स सीडीईआर के निदेशक डॉ. ओपी खरबंदा का कहना है कि 2010 से 2012 के बीच इस अध्ययन का प्री पायलट चरण पूरा किया था। वहीं 2012 से 2014 के बीच 164 कटे होंठ वाले बच्चों पर अध्ययन किया था। ये बच्चे एम्स, सफदरजंग और मेदांता अस्पताल में उपचार करा रहे थे। डॉ. खरबंदा ने बताया कि अभी इस अध्ययन का अंतिम चरण चल रहा है, जिसके लिए दिल्ली के अलावा हैदराबाद, गुवाहाटी और लखनऊ के डॉक्टर सहयोग कर रहे हैं। डॉ. खरबंदा का कहना है कि  इस विकृति से जूझ रहे मरीजों को इलाज की तत्काल जरूरत होती है और इसके लिए गुणवत्तापूर्ण देखभाल प्रदान की व्यवस्था में सुधार की रणनीति बनाने की जरूरत है।      

बच्चों को आती है काफी दिक्कतें 
 
डॉ. खरबंदा ने बताया कि अध्ययन में पता चला है कि शराब, धूम्रपान, चूल्हे पर काम करना, ज्यादा दवाएं लेना या किसी रेडिएशन के संपर्क में आने के कारण होंठ कटे हो सकते हैं या तालू में कोई विकृति हो सकती है। कटे हुए होठों से बच्चे को बोलने और खाना चबाने में दिक्कत आती है। इससे दांत भी बेतरतीब हो जाते हैं, जबड़े से उनका तालमेल बिठाने में दिक्कत पेश आती है और चेहरे की आकृति बिगड़ी नजर आती है।
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