रोहिणी स्थित जयपुर गोल्डन अस्पताल की डॉ. श्रुति जैन कुछ केस स्टडी का हवाला देते हुए बताती हैं कि मिर्गी मस्तिष्क से संबंधित एक रोग है, जिसमें बार-बार दौरे पड़ते हैं। इनकी अवधि अधिक नहीं होती। जब मस्तिष्क की तंत्रिका कोशिकाएं विद्युतीय आवेशों को तेज गति से छोड़ती हैं, तो इसके कारण विद्युतीय तूफान यानी दौरे पड़ना शुरू होता है। जो लोग मिर्गी से पीड़ित हैं, उन्हें अपनी स्थिति छिपाना नहीं चाहिए।
वीडियो बनाना है जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि मिर्गी के मरीज के साथ-साथ उसके परिवार को भी बीमारी के प्रति पूरी जानकारी होनी चाहिए। अगर किसी को दौरे पड़ने की परेशानी है तो उसके परिजनों को तत्काल मोबाइल फोन में दौरे पड़ने के दौरान का वीडियो बना लेना चाहिए। इस वीडियो के जरिए इलाज करने वाले डॉक्टर को मरीज की स्थिति पता करने में आसानी हो सकती है।
80 फीसदी मरीज दवाओं से हो रहे ठीक
जीबी पंत अस्पताल के डॉ. दलजीत सिंह का कहना है कि जन्म के समय चोट लगने, सड़क दुर्घटना या किसी तरह के संक्रमण के कारण भी दौरे पड़ने की परेशानी हो सकती है। चूंकि चिकित्सीय क्षेत्र में नई तकनीकें आने से अब इसका उपचार आसान हो गया है। इसलिए दिल्ली के अस्पतालों में पहुंच रहे करीब 80 फीसदी मरीज दवाओं से ही ठीक हो रहे हैं। बहुत कम मरीजों को सर्जरी या अन्य उपचार की जरूरत पड़ती है।
इस तरह रखें सावधानी
डॉक्टरों का कहना है कि अगर किसी को मिर्गी आती है तो जरूरी है कि उसके मुंह में कुछ न डाला जाए। उसे नीचे लेटा दें या उसकी शारीरिक गतिविधियों को सीमित करने का प्रयास करें। भींचे हुए दांतों को बलपूर्वक खोलने का प्रयास करें। नाक के पास जूते, चप्पल या प्याज लाएं। साथ ही उसके आसपास भारी वस्तुएं नहीं होनी चाहिए।