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‘नोटा’ के इस्तेमाल ने बजाई खतरे की घंटी

Wed, 20 Dec 2017 10:37 AM IST
अतुल सिन्हा, नई दिल्ली
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मतदान में 'नोटा' का विकल्प - फोटो : अमर उजाला
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मतदान की लंबी कतारों में खड़े होकर अगर आप ये तय नहीं कर पा रहे कि इनमें से कोई भी उम्मीदवार आपकी नजर में सही है या नहीं, तो ये बेशक जनता के भीतर छिपे आक्रोश और निराशा का ही प्रतीक है। गुजरात में मोदी मैजिक चलने के बावजूद जिस तरह बड़ी संख्या में लोगों ने नोटा (नन ऑफ द अबव) का बटन दबाया, उससे साफ जाहिर है कि एंटी इन्क्बेंसी और विकल्पहीनता से वो कितने परेशान थे।
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अकेले गुजरात में साढ़े पांच लाख से ज्यादा लोगों ने नोटा का बटन दबाया जबकि हिमाचल में ऐसे 34 हजार से ज्यादा मतदाता थे जिनको कोई उम्मीदवार पसंद नहीं आया। गुजरात में 15 ऐसी सीटें हैं जिसपर नोटा का असर दिखा है और जहां भाजपा और कांग्रेस के बीच वोटों का अंतर महज दो हजार रहा है। कांग्रेस के खिलाफ अंतिम दौर की निगेटिव कैंपेनिंग से शायद इन मतदाताओं ने नोटा का इस्तेमाल किया, लेकिन भाजपा के खिलाफ कितनी नाराजगी है, ये तो साफ दिखी ही। 

भाजपा और कांग्रेस के अलावा तमाम पार्टियों और उम्मीदवारों के लिए ये इस बात का संकेत है कि अब मतदाताओं को आप जबरन वोट देने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। अगर ये प्रयोग शुरूआती दौर में ही इतने बड़े पैमाने पर जनता के असंतोष को जाहिर कर रहा है तो जाहिर है कि अब उम्मीदवारों के चयन को लेकर राजनीतिक पार्टियों को सजग रहने की जरूरत है। इसे भाजपा और कांग्रेस ने भी गंभीरता से लिया है। 
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गुजरात में करीब एक महीना पहले हार्दिक पटेल ने अपने पाटीदार समर्थकों से ये अपील की थी कि अगर उन्हें कोई विकल्प न मिले तो वो नोटा का बटन दबाएं, लेकिन भाजपा को वोट न दें। कुछ जगहों में इसका असर दिखा भी, लेकिन इससे ये बात भी साफ हो गई कि इनका भाजपा और कांग्रेस दोनों से ही भरोसा उठ गया है। भाजपा की मौजूदा सरकार से वो परेशान हैं लेकिन कांग्रेस को भी सही विकल्प नहीं मानते। 

2013 में चुनाव आयोग ने ये तय किया था कि अब मतदाताओं के सामने नोटा का विकल्प भी रखा जाए ताकि यह पता चल सके कि चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों या पार्टियों के प्रति उनकी राय क्या है। यह व्यवस्था इस बार से पूरी तरह लागू की गई और इस बात के संकेत मिल गए कि अब मतदाता इस विकल्प का इस्तेमाल भी तेजी से कर सकता है। जाहिर है अब राजनीतिक पार्टियों को भी अपनी रणनीति और जीत-हार का गुणा-भाग सोच समझ कर तय करना पड़ेगा।
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