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Venezuela: वेनेजुएला संकट से ओपेक की दादागिरी होगी खत्म, भारत को इस कारण मिल सकता है फायदा

सार

वेनेजुएला के अपदस्थ राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को गिरफ्तार कर अमेरिका के न्यूयॉर्क में स्थित डिटेंशन सेंटर में लाया गया है। ट्रंप एलान कर चुके हैं कि वेनेजुएला में अब अमेरिका कमान संभालेगा।
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अमेरिका के वेनेजुएला में कमान संभालने से ओपेक का दबदबा घटने की संभावना। - फोटो : ANI
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विस्तार
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वेनेजुएला संकट ने साल की शुरुआत में ही पूरी दुनिया को आर्थिक अनिश्चितता के दौर में धकेल दिया है। इस संकट का वैश्विक तेल बाजार पर क्या असर पड़ सकता है, इस पर अटकलें लगाई जा रही हैं। दुनिया में सबसे बड़ी तेल हिस्सेदारी (18 प्रतिशत) रखने के बाद भी वेनेजुएला तेल बाजार की वैश्विक सप्लाई में बहुत कम हिस्सेदारी रखता है। यही कारण है कि माना जा रहा है कि वेनेजुएला संकट से तेल कीमतों पर तुरंत कोई असर नहीं पड़ने जा रहा है। लेकिन इस संकट के कारण वायदा बाजार में तेल कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है जिसका असर दुनिया भर के बाजारों में देखने को मिल सकता है। 
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यदि अमेरिका वेनेजुएला के तेल व्यापार पर कब्जा कर लेता है तो इससे वह तेल के बड़े उत्पादक और निर्यातक के रूप में उभरेगा और इससे दुनिया के तेल व्यापार पर ओपेक की दादागिरी बहुत हद तक कमजोर हो सकती है। वहीं, अमेरिकी कंपनियों के सहयोग से भारतीय तेल कंपनियां नए निवेश कर इस क्षेत्र में पेट्रो उत्पादों की बड़ी खिलाड़ी बन सकती हैं। 

वेनेजुएला पर हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि अब अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला के तेल व्यापार को संभालेंगी। यदि अमेरिकी कंपनियां वेनेजुएला के तेल बाजार को नियंत्रित करती हैं तो उन्नत तकनीकी के कारण वेनेजुएला से तेल उत्पादन में भारी बढ़ोतरी हो सकती है। इससे वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को स्थिर रखने में सहायता मिल सकती है। फिलहाल इसी बात के अनुमान सबसे ज्यादा लगाए जा रहे हैं। कमजोर तकनीकी और अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण दुनिया का सबसे बड़ा तेल स्रोत होने के बाद भी वेनेजुएला अभी तेल उत्पादन में बहुत पीछे है।  
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'ओपेक का तेल व्यापार पर दबदबा होगा खत्म'
ऊर्जा मामलों के विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने अमर उजाला से कहा कि इस समय दुनिया के तेल बाजार पर तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक का  एकतरफा दबाव है। वह तेल कीमतों से लेकर तेल उत्पादन पर एक तरफा निर्णय लेकर दुनिया के व्यापार को प्रभावित करता है। लेकिन वेनेजुएला के तेल उत्पादन पर अमेरिकी प्रभुत्व हो जाने से अब दुनिया में तेल का व्यापार प्रभावित होगा। वेनेजुएला के सहयोग से अमेरिका तेल का बड़ा उत्पादक खिलाड़ी बन सकता है जिसके बाद ओपेक अकेले दम पर तेल कीमतों को बढ़ा-घटा नहीं सकेगा। यानी तेल बाजार में ओपेक की दावेदारी काफी हद तक कमजोर हो सकती है

इस समय दुनिया में तेल का पर्याप्त भंडार है। वेनेजुएला के पास 306 बिलियन बैरल तेल होने के बाद भी अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण वह केवल नौ लाख बैरल प्रतिदिन तेल बेच पाता है। इसका सबसे बड़ा हिस्सा अकेले चीन खरीदता है। भारत पहले वेनेजुएला से आठ से नौ फीसदी तेल खरीदता था, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण अब यह हिस्सेदारी एक-दो फीसदी तक सिमट गई है। ऐसे में वेनेजुएला संकट से तुरंत भारत को कोई नुकसान नहीं होगा।

भारत को लाभ होने की संभावना
उलटे वेनेजुएला संकट भारत के लिए आपदा में अवसर भी पैदा कर सकता है। भारतीय कंपनियां अब तक वेनेजुएला में तेल खरीद नहीं कर पा रही थीं, लेकिन वेनेजुएला में तेल उत्पादन में अमेरिकी कंपनियों के शामिल होने से उनकी सहयोगी कंपनियों के रूप में भारतीय तेल कंपनियों के पास भी यह अवसर उपलब्ध हो जाएगा कि वे वहां जाकर तेल पैदा करें। इससे भारत यूरोपीय-अमेरिकी बाजारों में तैयार पेट्रो उत्पादों का बड़ा खिलाड़ी बन सकता है।    

'वेनेजुएला के बहाने चीन पर भी दबाव बनाना चाहता है अमेरिका'
आर्थिक मामलों के जानकार डॉ. नागेंद्र कुमार शर्मा ने अमर उजाला से कहा कि वेनेजुएला संकट गहराया तो चीन में तेल कीमतों पर असर पड़ सकता है। ऐसा हआ तो इससे चीन की उत्पादन लाइन में प्रमुख वस्तुओं की कीमतों पर असर पड़ने की संभावना है। इसका असर अमेरिकी-यूरोपीय देशों पर भी पड़ सकता है। लेकिन इस समय अर्थव्यवस्था का दबाव झेल रहा अमेरिका स्वयं नहीं चाहेगा कि आवश्यक वस्तुओं की ग्लोबल सप्लाई पर असर पड़े। तेल कीमतों में स्थिरता बनाए रखना स्वयं अमेरिका के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। ऐसे में अमेरिका चीन के तेल आयात मार्ग में सीधे तौर पर कोई बाधा उत्पन्न करने की कोशिश नहीं करेगा।  

उन्होंने कहा कि, लेकिन वेनेजुएला संकट के सहारे अमेरिका इस समय के अपने सबसे बड़े प्रतिद्वंदी चीन को काबू में रखने की रणनीति पर काम कर सकता है। जिस समय वेनेजुएला पर अमेरिका का हमला हुआ, उस समय चीन के उच्च मंत्री और अधिकारी वेनेजुएला में ही थे। इसे महज एक संयोग नहीं माना जा रहा है। अनुमान है कि इसके सहारे अमेरिका ने चीन को संदेश देने की कोशिश की है। 

वेनेजुएला में अमेरिका का प्रभुत्व होने या उसकी पिट्ठू सरकार होने की स्थिति में चीन तेल जैसे महत्वपूर्ण वस्तु के आयात के लिए अकेले इस देश पर निर्भर नहीं रहना चाहेगा। वैकल्पिक स्रोतों के रूप में वह रूस और मध्य पूर्व पर ज्यादा निर्भर करेगा। लेकिन अकेले रूस को छोड़ दें तो अमेरिका मध्य पूर्व के देशों की सहायता से चीन पर मनौवैज्ञानिक दबाव बनाए रखने में सफल होगा। सऊदी अरब सहित मध्य पूर्व के तमाम देशों में अमेरिका की दखल बहुत मजबूत है। समय आने पर वह इसका लाभ उठाने की कोशिश कर सकता है।

आर्थिक-सामरिक विशेषज्ञ मानते हैं कि आर्थिक संकट और आंतरिक राजनीतिक अशांति से घिरा ईरान इस समय अमेरिका के लिए संकट बनने की स्थिति में नहीं है, लेकिन चीन के साथ उसका गठजोड़ अमेरिका को परेशान कर सकता है। आर्थिक-राजनीतिक कारणों से ईरान घिरा हुआ है, ऐसे में यदि अमेरिका चीन को संभाल सकने में सफल हो जाए तो इससे दुनिया की राजनीति में लंबे समय तक उसकी बादशाहत बरकरार रह सकती है। वेनेजुएला का दांव अमेरिका के बहुआयामी हितों को साधने वाला सोच समझ कर उठाया गया कदम है। 
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