रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा ने कहा कि अमेरिकी राजस्व विभाग ने भारत को बताया है कि एक भारतीय जहाज ने बीच समुद्र में एक रूसी टैंकर से कच्चा तेल लादा और उसे गुजरात लेकर गया। यहां उसे शोधित कर उसे न्यूयॉर्क भेज दिया गया। इस दौरान यह जानकारी छिपा ली गई कि कच्चा तेल रूस से लिया गया है।
अमेरिका ने भारत से इस बात को लेकर चिंता जताई है कि रूस के कच्चे तेल को भारत में शोधित किया जा रहा है और कच्चे तेल के मूल स्रोत की जानकारी को छिपाकर इसे अमेरिका भेजा जा रहा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा ने आजादी की 75वीं वर्षगांठ के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी दी।
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उन्होंने कहा कि अमेरिकी राजस्व विभाग ने भारत को बताया है कि एक भारतीय जहाज ने बीच समुद्र में एक रूसी टैंकर से कच्चा तेल लादा और उसे गुजरात लेकर गया। यहां उसे शोधित कर उसे न्यूयॉर्क भेज दिया गया। अमेरिका भेजने के दौरान इस बात की जानकारी छिपा ली गई कि कच्चा तेल रूस से लिया गया है। ऐसा अमेरिकी प्रतिबंध से बचने के लिए किया गया क्योंकि अमेरिका ने रूस से तेल आयात पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। पात्रा ने कहा कि युद्ध इसी तरह काम करता है। पात्रा के इस खुलासे पर नई दिल्ली स्थित अमेरिकी दूतावास ने कोई टिप्पणी नहीं की है। पात्रा की यह टिप्पणी इस बारे में अमेरिकी चिंता के बारे में किसी अधिकारी का पहला बयान है।
यूरोप के सबसे बड़े परमाणु पावर प्लांट पर फिर गोलाबारी
यूरोप के सबसे बड़े यूक्रेन के जैपोरिझिया स्थित परमाणु पावर प्लांट पर शनिवार को फिर से गोलाबारी हुई। इस पावर प्लांट पर रूस का कब्जा है। यूक्रेन और रूस दोनों ने ही एक-दूसरे को इस बिजलीघर पर हमले का जिम्मेदार ठहराया है। शुक्रवार को रूस की ओर से बुलाई गई संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की बैठक में इस पावर प्लांट पर खतरे के प्रति विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता जताई थी। यहां से रेडिएशन फैला तो वह पूर्वी यूरोप को चपेट में ले सकता है। इस बीच, रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी फौजों ने दोनेस्क के बाहर स्थित पिस्की गांव पर पूरा नियंत्रण कर लिया है।
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यूक्रेन का रूस पर दवा आपूर्ति बाधित करने का आरोप
यूक्रेन के स्वास्थ्य मंत्री विक्टर लियाश्को ने रूस पर उसके कब्जे वाले क्षेत्रों में किफायती दवाओं की आपूर्ति बाधित करने का आरोप लगाया है। उन्होंने इसे मानवता के खिलाफ अपराध करार दिया।
विक्टर लियाश्को ने एक साक्षात्कार में कहा, रूसी अधिकारियों ने कब्जे वाले शहरों, कस्बों व गांवों में लोगों को सरकार की सब्सिडी वाली दवाएं उपलब्ध कराने के प्रयासों को अवरुद्ध किया है। युद्ध के पूरे छह महीनों के दौरान रूस ने मानवीय गलियारों को अनुमति नहीं दी, जिससे हम जरूरतमंद रोगियों को दवा उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। उन्होंने कहा, हम मानते हैं कि ये कदम जानबूझ कर उठाया जा रहा है जो मानवता के खिलाफ अपराध है। बता दें, यूक्रेन की सरकार एक विशेष कार्यक्रम के तहत कैंसर और अन्य जटिल रोगों से जूझ रहे लोगों को दवाएं प्रदान करती है।