दुनिया के दिग्गज सर्च इंजन गूगल की अविश्वास प्रथाओं के खिलाफ अमेरिकी अदालत के ऐतिहासिक फैसले ने भारत में प्रतिस्पर्धा नियामकों, नीति निर्माताओं के लिए जमीनी निहितार्थ पैदा किए हैं। इस अग्रणी फैसले में अमेरिकी जिला जज वाशिंगटन डीसी अमित मेहता ने गूगल को एकाधिकारवादी बताया है। अब भारत में भी गूगल पर प्रतिस्पर्धा आयोग का शिकंजा कसा जा सकेगा।
डिजिटल न्यूज मीडिया लगाता रहा है हेरफेर का आरोप
डिजिटल समाचार मीडिया समेत भारतीय डिजिटल कंपनियां भी गूगल सर्च इंजन पर ऑनलाइन ट्रैफिक में हेरफेर का आरोप लगाती रही हैं। यह भी आरोप है कि गूगल विज्ञापन राजस्व के बारे में जानकारी साझा करने में पारदर्शी नहीं है। कंपनियों का कहना है कि भले ही उनमें से कई ने गूगल के साथ राजस्व साझेदारी समझौते किए हैं, लेकिन वे समझौते मजबूरी में हैं और ये करार उचित नहीं हैं।
डिजिटल इंडिया एक्ट भी ठंडे बस्ते में
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय पिछले कुछ सालों से डिजिटल इंडिया एक्ट पर काम कर रहा है था, जबकि कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने अपना खुद का मसौदा डिजिटल प्रतिस्पर्धा विधेयक तैयार किया। हालांकि यह डिजिटल समाचार प्रकाशकों की बुनियादी मांग को संबोधित करने में विफल रहा और प्री बार्गेनिंग कोड के सफल और विश्वसनीय उपकरण की अनदेखी की।