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अमेरिकी कंपनी बोइंग ने अपने एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू जेट का किया सफल स्की-जंप

Tue, 22 Dec 2020 07:59 AM IST
देव कश्यप एजेंसी, नई दिल्ली
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F / A-18 Super Hornet fighter jet - फोटो : Twitter
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दुनिया की बड़ी एयरोस्पेस कंपनी बोइंग ने कहा कि अमेरिकी नौसेना के साथ मिलकर कंपनी ने एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू जेट का सफल स्की-जंप किया। यह अभ्यास भारतीय नौसेना के लिए किया गया और वॉशिंगटन डीसी स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी भी इसके गवाह बने। अमेरिकी कंपनी भारत नौसेना के लिए अपने एडवांस लड़ाकू विमान को बेचने का प्रस्ताव किया है।  

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बोइंग-डिफेंस के इंडिया फाइटर्स सेल्स प्रमुख अंकुर कांगलेकर के मुताबिक, ये टेस्ट अमेरिका के एक नौसेना एयर स्टेशन (पैटूक्सेंट नदी, एमडी) में किया गया। इसमें भारतीय नौसेना जो ‘स्टोबार’ यानी शॉर्ट टेकऑफ बट अरेस्टेड रिकवरी तकनीक इस्तेमाल करती है, उसके तहत परीक्षण किया गया। उनके मुताबिक, ये स्की-जंप का पहला टेस्ट था, जिससे पता चलता है कि एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू जेट भारतीय नौसेना के विमानवाहक युद्धपोतों से ऑपरेट कर सकता है।


बोइंग अमेरिकी नौसेना के लिए भी लड़ाकू विमान बनाती है लेकिन अमेरिकी विमानवाहक युद्धपोत कैटापुल्ट तकनीक का इस्तेमाल करते हैं, इसलिए बोइंग ने अब भारतीय नौसेना के स्की-जंप तकनीक के जरिए अपने एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू जेट का टेस्ट किया है। यह टेस्ट किसी एयरक्राफ्ट कैरियर पर नहीं, बल्कि जमीन पर स्की-जंप प्लेटफार्म बनाकर किया गया है।
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अमेरिकी कंपनी का दावा है कि सुपर हॉर्नेट भारत की युद्धक क्षमता बढ़ाएगा। साथ ही ये बेहद ही मुनासिब दामों में भी उपलब्ध होगा। कंपनी बाई-इंडिया, फॉर इंडिया के तहत भी इस प्रोग्राम को आगे बढ़ा सकती है। उसका दावा है कि इसके साथ ही सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ये बोइंग के पी8आई टोही विमानों के साथ मिलकर फोर्स ‘मल्टी-प्लायर’ का काम करेगा, जिन्हें भारतीय नौसेना पहले से ही ऑपरेट करती है, समंदर में निगरानी करने के लिए इस्तेमाल करती है। बोइंग का दावा है कि एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट लड़ाकू जेट लाइफ-साइकिल करीब 10 हजार घंटे उड़ान की है, जिससे ये एक लंबे समय तक भारतीय नौसेना को अपनी सेवाएं दे सकेगा और जरूरत पड़ने पर अपग्रेड भी किया जा सकता है।

रूसी मूल के एयरक्राफ्ट कैरियर का इस्तेमाल कर रही नौसेना
भारतीय नौसेना अभी अपने एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रमादित्य के लिए रूसी लड़ाकू विमान मिग-29के इस्तेमाल करती है। भारतीय नौसेना का एक स्वदेशी विमानवाहक युद्धपोत विक्रांत कोच्चि शिपयार्ड में जल्द बनकर तैयार होने वाला है। हालांकि इसके 2022 में नौसेना में शामिल किए जाने की संभावना है। हाल ही में मिग-29के के कम से कम तीन दुर्घटना के मामले सामने आ चुके हैं। 26 नवंबर को ही गोवा के पास एक मिग-29के अरब सागर में हादसे का शिकार हो गया था, जिसमें एक पायलट की मौत हो गई थी। उसके बाद से ही मिग29के विमानों को बदलने की चर्चा शुरू हो गई है।

2018 में शुरू की थी प्रक्रिया
भारतीय नौसेना ने 2018 में अपने कैरियरों के लिए 57 मल्टी रोल लड़ाकू विमानों की खरीद प्रक्रिया शुरू की थी।

ये विमान रेस में
भारतीय नौसेना एयरक्राफ्ट कैरियर के लिए मौजूदा में छह विमान राफेल (दसॉल्ट, फ्रांस), एफ/ए-18 सुपर हॉर्नेट (बोइंग, अमेरिका), मिग-29के (रूस), एफ-35बी व एफ-35सी (लॉकहीड, अमेरिका) और ग्रिपन (साब, स्वीडन) रेस में है।

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