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एक्सप्लेनर: क्या है अमेरिकी आयोग USCIRF, जिसके RSS पर बयानों से मचा बवाल, पहले कब संगठन को लेकर पैदा किए विवाद

Tue, 25 Aug 2026 12:51 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला

सार

अमेरिकी आयोग USCIRF ने RSS पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है, जिस पर भारत के विदेश मंत्रालय ने कड़ी आपत्ति जताई है। जानिए क्या है यूएससीआईआरएफ, इसका इतिहास और पिछले 20 वर्षों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर खड़े किए गए बड़े विवाद।
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अमेरिका दौरे पर जाने वाले हैं आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी प्रशासन की सलाहकार संस्था- यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) की एक हालिया रिपोर्ट पर जबरदस्त विवाद हुआ है। दरअसल, इस रिपोर्ट के जरिए यूएससीआईआएफ ने अमेरिकी सरकार से भारत के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर पाबंदियां लगाने की मांग की है। इतना ही नहीं रिपोर्ट में ट्रंप प्रशासन को सलाह दी गई है कि वह संघ के किसी नेता को राजनयिक सम्मान न दे और उनके साथ उच्च-स्तरीय बैठक में भी हिस्सा न ले।
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अमेरिका के कानून के तहत स्थापित किए गए इस आयोग ने रिपोर्ट में भारत को लेकर और भी कई टिप्पणियां की हैं। हालांकि, भारत के विदेश मंत्रालय ने इस संस्था को पूरी तरह पक्षपाती घोषित किया है। दरअसल, यह पहली बार नहीं है जब यूएससीआईआरएफ ने अपनी सालाना रिपोर्ट में भारत या इससे जुड़े लोगों/संगठनों को निशाना बनाया है। यह संस्था अलग-अलग मौकों पर ऐसा करती आई है, जिसे लेकर कई मौकों पर विवाद खड़े हुए हैं। 

यह यूएससीआईआरएफ क्या है? इस संस्था का इतिहास क्या रहा है? अमेरिका के कानून के तहत गठित इस आयोग की रिपोर्ट का महत्व कितना होता है? आरएसएस को लेकर आयोग का ताजा बयान क्या है? पहले आरएसएस को लेकर इस संस्था ने क्या-क्या कहा है? क्यों इसके रवैये को दक्षिण एशिया के देशों और खासतौर पर भारत के लिए पक्षपाती कहा जाता रहा है? आइये जानते हैं...


पहले जानें- क्या है अमेरिकी संस्था यूएसीआईआरएफ? 

यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम (यूएससीआईआरएफ) - फोटो : अमर उजाला
क्या हैं इस संस्था की जिम्मेदारियां, रिपोर्ट का असर क्या? 
यह आयोग हर साल एक विस्तृत वार्षिक रिपोर्ट जारी करता है, जिसमें वैश्विक स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता के उल्लंघन का आकलन किया जाता है। इनके जरिए यूएससीआईआरएफ अमेरिकी विदेश मंत्रालय को गंभीर उल्लंघन करने वाले देशों को विशेष चिंता वाले देश (Countries of Particular Concern - CPC) के रूप में नामित करने या उन्हें विशेष निगरानी सूची (Special Watch List - SWL) में डालने की सिफारिश करता है।

यूएससीआईआरएफ अमेरिकी विदेश मंत्रालय से प्रशासनिक रूप से पूरी तरह स्वतंत्र होकर काम करता है। इसकी दी गई सिफारिशें अमेरिकी सरकार या विदेश मंत्रालय के लिए बाध्यकारी नहीं होती हैं। यह केवल एक सलाहकार निकाय के रूप में कार्य करता है।

क्या है इस संगठन की संरचना, रकम कहां से जुटाता है?
  • इस आयोग में आयुक्त होते हैं जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति और संसद के दोनों राजनीतिक दलों- डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन के नेताओं की ओर से नियुक्त किया जाता है। 
  • इसके अलावा, अमेरिकी विदेश मंत्रालय के एंबेसडर-एट-लार्ज', जो कि कुछ खास मामलों के राजनयिक होते हैं, इसके गैर-मतदान वाले पदेन सदस्य होते हैं।
  • यह आयोग अमेरिकी संसद के जरिए दी गई फंडिंग से संचालित होता है। यानी इसे चलाने के लिए अमेरिकी करदाताओं की रकम इस्तेमाल की जाती है।


यूएससीआईआरएफ की आरएसएस पर किन टिप्पणियों से विवाद?

यूएससीआईआरएफ के आयुक्त जीन मिल्स। - फोटो : अमर उजाला

भारत सरकार की इस पर क्या टिप्पणी?

विदेश मंत्रालय ने यूएससीआईआरएफ की टिप्पणियों को पूरी तरह से पक्षपाती, गलत और विशेष राजनीतिक हितों या एजेंडे से प्रेरित करार दिया है। भारत सरकार के प्रवक्ताओं के मुताबिक, यह आयोग लगातार भारत की एक विकृत तस्वीर पेश करता है। सरकार का स्पष्ट कहना है कि आयोग की टिप्पणियां भारत, इसके सांविधानिक ढांचे, इसकी बहुलता और इसके लोकतांत्रिक लोकाचार की गंभीर समझ की कमी को दर्शाती हैं। 

विदेश मंत्रालय के मुताबिक, आयोग की रिपोर्ट ठोस तथ्यों के बजाय संदिग्ध स्रोतों और वैचारिक आख्यानों पर आधारित होती हैं। इस प्रकार बार-बार तथ्यों को गलत तरीके से पेश करने से खुद यूएससीआईआरएफ की निष्पक्षता और विश्वसनीयता ही कमजोर होती है।

ये भी पढ़ें: Mohan Bhagwat: मोहन भागवत के अमेरिका दौरे पर क्यों बढ़ा विवाद? USCIRF की मांग पर हिंदू संगठन ने जताई आपत्ति?

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल। - फोटो : अमर उजाला

पहले कब-कब आरएसएस पर विवाद पैदा कर चुका है यूएससीआईआरएफ?

यूएससीआईआरएफ की तरफ से  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को लेकर विवाद पैदा करने की कोशिश नई नहीं है।  आयोग अपनी वार्षिक रिपोर्टों में पिछले दो दशकों से आरएसएस और उसके सहयोगी संगठनों को लगातार निशाना बनाता रहा है, जिससे कई बार गंभीर विवाद पैदा हुए हैं। 

मैरीलैंड चैरिटी और सिस्को-ओरैकल विवाद 
2002 में एक गैर-सरकारी संगठन की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि अमेरिका के मैरीलैंड में स्थित एक चैरिटी के संबंध भारत के आरएसएस और अन्य हिंदू संगठनों से हैं। इसके बाद सिस्को और ओरेकल जैसी दिग्गज तकनीकी कंपनियों ने उस चैरिटी को दिए जाने वाले दान को निलंबित कर दिया था, जिस पर गंभीर विवाद हुआ था।

गुजरात दंगों में संघ की भूमिका के आरोप
आयोग ने अपनी रिपोर्ट्स में अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार समूहों का हवाला देते हुए दावा किया था कि 2002 के गुजरात दंगों में वीएचपी, आरएसएस और बजरंग दल जैसे संगठन हिंसा के मुख्य दोषी थे। आयोग ने भारत सरकार, स्थानीय पुलिस और न्याय व्यवस्था पर आरोप लगाया था कि वे संघ परिवार से जुड़े इन संगठनों के खिलाफ सबूतों की पर्याप्त जांच करने और अपराधियों को सजा देने में असमर्थ रहे हैं।

दिल्ली में ईसाई पादरी पर हमले का दावा
2010 की वार्षिक रिपोर्ट में आयोग ने आरोप लगाया कि नई दिल्ली में 25 आरएसएस सदस्यों ने हॉकी स्टिक से एक ईसाई पादरी पर बेरहमी से हमला किया था। रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस ने इस मामले में एफआईआर तो दर्ज की, लेकिन आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस आरोप तय नहीं किए।

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कंधमाल हिंसा में संलिप्तता और धमाकों के आरोप 
2011 की रिपोर्ट में आयोग ने दावा किया कि ओडिशा के कंधमाल (2007-08) में हुई ईसाई-विरोधी हिंसा के आरोपियों में आरएसएस सदस्य शामिल थे। इसके साथ ही, 2007 और 2008 के मालेगांव जैसे बम धमाकों की जांच को लेकर भी कई अपुष्ट आरोप लगाए गए थे। 

ईसाई-मुस्लिमों की घर वापसी के आरोप
2015 की रिपोर्ट में आयोग ने आरोप लगाया कि दिसंबर 2014 में आरएसएस ने उत्तर प्रदेश में हजारों ईसाई और मुस्लिम परिवारों के पुनर्धर्मांतरण (घर वापसी) के लिए प्रेरित किया गया था। इसमें उत्तर प्रदेश के आगरा के एक कथित धर्मांतरण और मध्य प्रदेश में ईसाइयों के जबरन धर्मांतरण से जुड़े आरोप लगाए गए थे। 

भारत में 2011 की जनगणना के हिसाब से धार्मिक जनसंख्या। - फोटो : अमर उजाला
हिंदुत्व विचारधारा पर जोर देने का दावा
2017 की रिपोर्ट में दावा किया गया कि सत्तारूढ़ दल (भाजपा) की स्थापना आरएसएस के सहयोग से हुई थी और दोनों के बीच गहरे संबंध हैं जो भारत को हिंदू राष्ट्र बनाने की हिंदुत्व विचारधारा को बढ़ावा देते हैं। रिपोर्ट में यह विवादास्पद दावा भी किया गया कि मुस्लिम समुदाय के लोग आरएसएस की ओर से डराए जाने और पुलिस में उनके प्रभाव के की वजह से शिकायतें दर्ज नहीं कराते हैं।

स्कूलों में प्रभाव बढ़ाने और एबीवीपी पर आरोप
  • 2019 की रिपोर्ट में आरएसएस के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) पर कॉलेज परिसरों में प्रभाव बढ़ाने और छात्रों के एक वर्ग की आवाजों को दबाने का आरोप लगाया गया था।
  • आयोग ने आरोप लगाया कि आरएसएस और भाजपा ने गौ-संरक्षण के मुद्दे को बढ़ावा दिया, जिससे कई राज्यों में सख्त कानून बने और अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की भी कुछ घटनाएं हुईं।
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अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत की संघ प्रमुख से मुलाकात पर आपत्ति 
2022 की रिपोर्ट में यूएससीआईआरएफ ने भारत में तत्कालीन अमेरिकी कार्यवाहक राजदूत अतुल कश्यप की ओर से सितंबर 2021 में संघ प्रमुख मोहन भागवत से की गई मुलाकात का विशेष रूप से जिक्र किया था और इस पर आपत्ति जताई थी।

इसके अलावा अमेरिका का यह संगठन लगातार अपनी रिपोर्ट्स में आरएसएस और भारत में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर कई अपुष्ट और आधारहीन दावे करता रहा है। साथ ही अमेरिकी सरकार से इन आरोपों पर जांच और पाबंदियों की मांग भी करता आया है। हालांकि, जॉर्ज बुश, बराक ओबामा, डोनाल्ड ट्रंप और जो बाइडन के नेतृत्व वाली सरकारों ने यूएससीआईआरएफ की सिफारिशों पर खास ध्यान नहीं दिया है।

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