राष्ट्रपति जो बाइडन प्रशासन ने ‘चाइल्ड स्टेटस प्रोटेक्शन एक्ट’ (ड्रीमर्स यानी सीएसएपीए) के तहत कुछ स्थितियों में किसी प्रवासी की आयु की गणना के लिए नीति संबंधी एक नियमावली के अद्यतन (अपडेट) की घोषणा की है। इसके तहत उन हजारों लोगों को वीजा हासिल करने में मदद मिलेगी जो बचपन में माता-पिता के सात अमेरिका आकर बसे हैं।
यह कदम भले ही छोटा है, लेकिन इसे उन लोगों की समस्याओं को दूर करने के लिए एक अहम कदम के तौर पर देखा जा रहा है, जिनकी वीजा हासिल करने की आयु सीमा निकल गई है। अमेरिका में परिवार द्वारा प्रायोजित या रोजगार-आधारित वीजा के लिए अपने माता-पिता की स्वीकृत अर्जी के आधार पर वैध स्थायी निवासी का दर्जा प्राप्त करने के लिए आवेदक की आयु 21 वर्ष से कम होनी चाहिए। यदि आव्रजन की प्रक्रिया के दौरान आवेदक 21 वर्ष का हो जाता है, यानी अगर उसकी आयु निर्धारित उम्र से अधिक हो जाती है, तो वह माता-पिता की अर्जी के आधार पर उनके साथ रहने का आम तौर पर हकदार नहीं रहता है। बाइडन प्रशासन के नए दिशा-निर्देश के तहत सीएसपीए के लिए इन प्रवासियों की आयु की गणना के मकसद से ‘फाइनल एक्शन डेट चार्ट’ के बजाय ‘डेट्स ऑफ फाइलिंग चार्ट’ का इस्तेमाल करेगी। अमेरिकी कांग्रेस की सदस्य देबोराह रॉस ने एक ट्वीट में कहा- मैं इसके लिए आभारी यूएससीआईएस की हूं।
लंबे समय से किया गया अनुरोध
निर्धारित आयु बीत जाने के कारण परेशानियों का सामना कर रहे करीब दो लाख लोगों का नेतृत्व करने वाले दीप पटेल ने कहा, यूएससीआईएस ने आधिकारिक रूप से वह नीतिगत बदलाव किया, जिसका हम लंबे समय से अनुरोध कर रहे थे।
एच-1 बी : वीजा छूट अवधि बढ़ाने की मांग
वाशिंगटन। भारतीय-अमेरिकी प्रौद्योगिकी उद्यमी व अकादमिक ने कहा है कि हाल ही में तकनीकी उद्योग में पेशेवरों की बड़े पैमाने पर आवक एच-1 बी वीजाधारकों के लिए एक बुरे सपने जैसी हो गई है। उन्हें 60 दिन की अवधि में पुरानी नौकरी छूटने पर नई नौकरी ढूंढना होता है, जो न मिलने पर उद्यमियों ने मांग की है कि इसके लिए वीजा अवधि की सीमा में छूट बढ़ाकर छह माह की जानी चाहिए।
‘ड्रीमर्स’ कौन हैं, जिन्हें नए कानून से फायदा
अमेरिकन ड्रीम एंड प्रॉमिस एक्ट’ से लगभग एक करोड़ 10 लाख ऐसे अाप्रवासियों को अमेरिका की नागरिकता मिल सकती है, जिनके पास वैध दस्तावेज नहीं हैं। इन्हें ही अमेरिका में ‘ड्रीमर्स’ कहा जाता है। यानी ऐसे अप्रत्यक्ष अाप्रवासी, जो माता-पिता के साथ बचपन में अमेरिका आए, पर दस्तावेज न होने से इन्हें कानूनी निगरानी में रहना होता है। इन्हें वापस इनके देश भेजने की बात भी होती रहती है, इनमें 5 लाख से अधिक भारतीय हैं।