विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि पश्चिमीकरण को ही प्रगति का मानक मानने वाला युग पीछे छूट गया है। अब कई ऐसी भाषाएं-परंपराएं वैश्विक मंच पर उभर रही हैं, जो औपनिवेशिक युग के दौरान दबा दी गई थीं। उन्होंने जोर दिया कि वैश्वीकरण का मतलब एकरूपता से नहीं, बल्कि हमारी दुनिया की विविधता को समझने और स्वीकार करने से है। यही एक लोकतांत्रिक विश्व व्यवस्था का वास्तविक अर्थ भी है।
विदेश मंत्री यहां ‘देनाराउ कनवेंशन सेंटर’ में 12वें विश्व हिंदी सम्मेलन के उद्घाटन के अवसर पर बोल रहे थे। फिजी सरकार और भारतीय विदेश मंत्रालय की ओर से आयोजित इस सम्मेलन में दुनियाभर से हिंदी के करीब 1,200 विद्वान व लेखक भाग ले रहे हैं। तीन दिन चलने वाले सम्मेलन के उद्घाटन मौके पर फिजी के राष्ट्रपति रातू विलीमे कटोनिवेरी के अलावा भारत के गृह राज्य मंत्री अजय मिश्र व विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन भी मौजूद थे। फिजी में हिंदी को आधिकारिक भाषा का दर्जा हासिल है।
अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में पुनर्संतुलन
यह जिक्र करते हुए कि अधिकांश देशों ने पिछले 75 वर्षों में स्वतंत्रता हासिल की है जिसके चलते विश्व व्यवस्था में पुनर्संतुलन हो रहा है। शुरुआत में इसका स्वरूप आर्थिक था, लेकिन जल्द ही राजनीतिक पहलू भी दिखा। इस प्रवृत्ति से व्यापक बहु-ध्रुवीयता उत्पन्न हो रही है।
हिंदी भारत और अन्य देशों को जोड़ने का माध्यम
जयशंकर ने कहा कि भाषा न केवल पहचान की अभिव्यक्ति है, बल्कि भारत और अन्य देशों को जोड़ने का माध्यम भी है। उन्होंने व राष्ट्रपति रातू ने साझा डाक टिकट भी जारी किया। पहले उद्घाटन सत्र में फिजी के पीएम सित्विनी राबुका को आना था, लेकिन संसद सत्र के चलते कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने भाग लिया। राबुका हाल ही में प्रधानमंत्री बने हैं। विदेश मंत्री जयशंकर ने फिजी के उपप्रधानमंत्री बिमान प्रसाद से मुलाकात कर द्विपक्षीय रिश्तों को और प्रगाढ़ करने के तौर-तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने ट्वीट किया, फिजी के उपप्रधानमंत्री बिमान प्रसाद से मिलकर अच्छा लगा।