उड़ी में सेना के शिविर पर हुए आतंकी हमले की जांच में जुटी एनआई टीम ने इस बात की संभावना जताई है कि हमले से पूर्व बेस कैंप की दो गार्ड पोस्ट के बीच तालमेल की कमी थी जिसकी वजह से आतंकियों को हमले का मौका मिल गया।
बता दें कि हमले के बाद से ही बेस कैंप की सुरक्षा में चूक का मामला उठाया जा रहा है। इस बात को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं कि सुरक्षा में चूक की वजह से ही आतंकियों को बेस कैंप में दाखिल होने का मौका मिल पाया। रक्षामंत्री मनोहर पारिकर भी इस बात को मान रहे हैं।
पीटीआई की खबर के अनुसार मामले की जांच कर रही एनआईए की टीम ने संभावना जताई है, बेस कैंप पर हमला करने वाले चारों आतंकी पाक अधिकृत कश्मीर के हाजी पीर दर्रा को 16/17 सितंबर की रात को पार करते हुए बाड़ को काटकर भारतीय सीमा में दाखिल हुए। इसके बाद उन्होंने कैंप के नजदीकी सुखदर गांव में ही रात बिताई जहां से उड़ी बिग्रेड हेडक्वार्टर में सैनिकों की आवाजाही और अंदर का नजारा साफ देखा जा सकता है।