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उरी हमलाः सालभर पहले जब आतंकियों ने दिया था कभी न भूलने वाला जख्म

Tue, 19 Sep 2017 12:11 PM IST
amarujala.com- Presented By: पूजा मेहरोत्रा
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Uri attack
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उरी हमले को एक साल हो चुका है। जले हुए बैरक आज भी उस दिन की याद को ताजा करा रहे हैं। 18 सितंबर 2016 के बाद से इस बैरक और यहां के आसपास के लोगों की पूरी जिंदगी बदल चुकी हैं।उरी में चलने वाली गाड़ियों को आज भी मॉनिटर किया जा रहा है जबकि रात में उस इलाके से आम लोगों का गुजरना मना है। इस हमले में 19 सैनिकों की मौत हुई थी। उरी हमले के बाद यहां रह रहे लोगों की पूरी जिंदगी बदल चुकी है। पीओके से सटे उड़ी तहसील आज भी उरी हमले की उस त्रासदी से उबर नहीं पाई है। 
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उत्तरी कश्मीर के उरी सेक्टर में 18 सितंबर 2016, रविवार सुबह भारी मात्रा में हथियारों से लैस आतंकियों ने सेना के 12 इनफैंट्री  ब्रिगेड मुख्यालय पर हमला किया था। उरी हमले को एक साल भले ही बीत चुका है लेकिन उरी तहसील और आसपास रहने वाले करीब 30,000 लोगों की जिदंगी प्रभावित हुई है। वैसे तो आर्मी ने इस पूरे इलाके में काफी ढील दे दी है फिरभी 25 गांवों को जोड़ने वाला उरी संतरा माइक रोड आज भी शाम 6 बजते ही बंद कर दिया जाता है। और गांव वाले या शहर वाले जो जहां हैं वहीं रुक जाते हैं। 

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19 सैनिक मारे गए थे इस आतंकी हमले में

उड़ी हमला
पीओके से निकलकर 4 आतंकी सलमाबाद नाले (झेलम नदी) के रास्ते उड़ी सेक्टर में पहुंचे। आतंकियों के पास भारी मात्रा में असलहा और ग्रेनेड मौजूद थे। इस बार भी आतंकियों ने पठानकोट हमले के तर्ज पर हमला करने की प्लानिंग की थी। पठानकोट में भी आतंकी नालों के रास्ते घुसपैठ करके भारतीय सीमा में दाखिल हुए थे।

सुबह करीब सवा पांच बजे आतंकियों ने उरी की आर्मी यूनिट में स्थित प्रशासनिक बेस कैंप के पिछले हिस्से पर पहला हमला बोला। कुछ ऐसे ही जनवरी में पठानकोट स्थित एयरफोर्स बेस पर हमला किया गया था। वहां भी सुबह के वक्त ही आतंकी एयरफोर्स स्टेशन में दाखिल हुए थे। उरी में भी आतंकियों का दस्ता आत्मघाती था, जिसका मकसद सेना को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाना था।

उरी के प्रशासनिक बेस की इस इमारत में सेना की अलग-अलग यूनिट के जवान थे, इनमें कुछ अपनी ड्यूटी बदल रहे थे । वहीं डोगरा रेजीमेंट के कई जवान इमारत के पास के तंबुओं में सो रहे थे, जो कि पिछली रात अपनी ड्यूटी पूरी करके वापस लौटे थे। 
 
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आग लगने के बाद सोते हुए जवानों को संभलने का कोई मौका नहीं मिल सका था

Uri Attacks
हमले के बाद आतंकियों के ग्रेनेड से हमला कर सेना के इन्हीं तंबुओं में आग लग दी । आग लगने के बाद सोते हुए जवानों को संभलने का कोई मौका नहीं मिल सका था जिसके कारण बड़ी संख्या जवान घायल हो गए थे । सेना के डीजीएमओ के मुताबिक 12 से 13 जवानों की मौत  तो सिर्फ आग की वजह से हुई थी।

आतंकी बड़ी मात्रा में हथियारों से लैस थे जिससे अंदाजा लगाया गया था कि पठानकोट की तर्ज पर ब्रिगेड मुख्यालय में काफी नुकसान करने की प्लानिंग थी। लेकिन कुशल रणनीति के चलते आर्मी और पैरा कमांडोज ने कुछ ही घंटों में चारों आतंकियों को ढेर कर दिया था। इसके बाद सेना के ब्रिगेड मुख्यालय और आसपास के इलाकों में सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया गया था । 
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