अब बात ना हो पाई, ऐ माई! ऊपर जात बानी...। चार दिन पहले बबुआ इहे कहले रहलन। हमरा का पता रहे कि ऊ ऐतना दूर जाए के बात करत रहलन। चार दिन पहले बेटे लांस नायक राजेश यादव से बात करने वाली मां सोमरिया देवी ये बातें करते हुए फ फक कर रो पड़ी। दुबहर थाना क्षेत्र के दुबहर यादव डेरा गांव निवासी लांस नायक राजेश कुमार यादव की घरवालों से आखिरी बार चार दिन पहले फोन पर बात हुई थी। सोमवार को जैसे ही पुलिस ने शहीद लांस नायक राजेश कुमार यादव के परिवार के लोगों को सूचना दी, उनका कलेजा हिल गया। घर में कोहराम न मचे इसके लिए परिवार के पुरुष सदस्य थाने पर ही आ गए थे। वहीं इस खबर से पूरा गांव हतप्रभ रह गया। हर किसी की आंखें अपने बहादुर बेटे के अंतिम दर्शन के इंतजार में लग गई। हालांकि विशेष विमान के बाबतपुर देर से पहुंचने की वजह से राजेश का पार्थिव शरीर मंगलवार को गांव पहुंचेगा, इस खबर ने माहौल को और गमगीन कर दिया।
परिवार के अनुसार बिहार रेजीमेंट में तैनात लांस नायक राजेश कुमार यादव जम्मू कश्मीर में करीब पांच साल से तैनात थे। करीब 20 दिन पहले ही वह छुट्टी पर गांव आए थे। गांव से लौटने के बाद उसे सूचना मिली कि उसे जम्मू कश्मीर के उड़ी सेक्टर पर जाना है तो उसने अपनी मां सोमरिया देवी को फोन कर करीब एक घंटे तक बातचीत की थी। मां को सांत्वना दे रहा है कि उड़ी सेक्टर में जाने के बाद कम ही बात हो सकेगी। उसे क्या मालूम था कि उसकी यह अंतिम बात मां से हो रही है।
जब सोमवार को दुबहर पुलिस ने लांस नायक राजेश के शहीद होने की सूचना दी तो पूरे परिवार पर पहाड़ टूट पड़ा। दिल की मरीज तथा गर्भवती पत्नी से परिवार के सदस्यों ने करीब दो -तीन घंटे तक इस खबर को छिपाया। लेकिन इतना बड़ा दर्द देर तक लोगों के कलेजे और आंखें रोक नहीं पाईं। घर की महिलाओं को जैसे ही अपने परिवार के लाडले के शहीद होने की सूचना मिली। महिलाओं के रुदन-क्रंदन को सुनकर हर कोई रो पड़ा। गांव का हर शख्स राजेश के घर उनके दर्द में शरीक होने पहुंच रहा था। सभी की आंखों में अपने जाबांज बेटे की शहादत पर आंसू तो थे लेकिन गर्व से सीना भी चौड़ा हो गया था।
परिवार के अकेले कमाऊ थे शहीद राजेश
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जम्मू कश्मीर के उड़ी सेक्टर में आतंकी हमले में शहीद राजेश अपने परिवार के इकलौते कमाऊ सदस्य थे। करीब 18 सालों से वे ही परिवार का पालन पोषण कर उनका ध्यान रखते थे। परिवार के किसी अन्य सदस्य को सरकारी नौकरी में न होने के चलते परिवार पर दोहरी आफत टूट पड़ी है। शहीद राजेश के बड़ा भाई श्री भगवान विकलांग हैं जबकि राकेश और विकेश घर खेती-किसानी करते हैं।
तीसरे संतान का मुंह नहीं देख सके
लांस नायक राजेश की दो पुत्रियां थी। जिसमें प्रीति आठ साल तथा राधिका दो वर्ष की है। प्रीति घोड़हरा स्थित एसजी पब्लिक स्कूल में कक्षा एक की छात्रा है। शहीद के छोटे भाई विकेश कुमार ने बताया कि भाभी पार्वती (शहीद राजेश की पत्नी) गर्भवती है। उनकी एक हफ्ते के अंदर डिलीवरी होने वाली है। वहीं मेरी 26 नवंबर को शादी तय हुई थी जिसमें भैया ने आने का वादा किया था।
शहीद के गांव में मातम
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जम्मू कश्मीर के उड़ी में सैन्य प्रतिष्ठान पर हुए आत्मघाती हमले में राजेश कुमार यादव के शहीद होने की सूचना पूरे इलाके में जंगल में आग की तरह फैल गई। गांव के लोग राजेश और दुबहर थाने पर पहुंचकर संवदेना प्रकट करते हुए जानकारी लेते रहे। राजेश के मिलनसार स्वभाव के चलते ग्रामीणों के आंखों से अनायास ही आंसू निकल रहे थे। दोस्त और परिचित सभी उसकी मिलनसार स्वभाव का जिक्र करते हुए फफक कर रो पड़ रहे थे।
दुबहर की क्रांति में जुड़ा एक और शहीद का नाम
आजादी की आंदोलन में अपने प्राणों की आहुति देने वाले मंगल पांडेय के बाद तीसरे नंबर के बलिदानी को राजेश ने कायम रखा है। जब-जब देश पर संकट के बादस्त्र मंडराए है। बागी बलिया के वीर जवानों ने अपने प्राणों की आहुति देकर भारत मां के कर्ज को चुकाने का कार्य किया है। जहां 1857 में शहीद मंगल ने सबसे पहले प्राणों की आहुति दी थी। इसी तरह से दुबहर थाना क्षेत्र के किशुनीपुर निवासी एसएसबी के जवान अमित तिवारी ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। केंद्रीय आयुध डिपो महाराष्ट्र में तैनात धर्मेंद्र यादव के शहीद होने के बाद दुबहर डेरा निवासी लांस नायक राजेश यादव ने शहादत देकर कुर्बानी देने वालों की सूची में अपना नाम दर्ज कराते हुए पुरानी यादें ताजा कर दी है। शहीद राजेश की शहादत पर क्षेत्र के लोग गर्व महसूस कर रहे है।