उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपीटीईटी) की तारीख सामने आ गई है। 28 नवंबर 2021 को वॉट्सऐप पर पर्चा लीक होने के कारण परीक्षा स्थगित कर दी गई थी। परीक्षा का आयोजन रविवार 28 नवंबर को उत्तर प्रदेश के 2000 से भी ज्यादा केंद्रों में हो रहा था। लेकिन परीक्षा शुरू होते ही यूपीटीईटी का प्रश्न पत्र वॉट्सऐप पर वायरल होने लगा। जैसे ही खबर फैली अधिकारियों को होश उड़ गए और तुरंत परीक्षा बंद करवा दी गई। लाखों छात्रों को इससे भारी मायूसी हुई और उनमें गुस्सा फैल गया।
एसटीएफ की छापेमारी
यूपी के 75 जिलों में ऑफलाइन मोड में सुबह 10 बजे यूपीटीईटी की परीक्षा की शुरुआत हुई थी। इसके बाद पेपर लीक की अफवाह फैल गई जो बात में सही साबित हुई। परीक्षा शुरू होने के कुछ देर बाद प्रश्न पत्र लीक होने की खबर मिलते ही एसटीएफ ने कई जगहों पर छापेमारी शुरू कर दी।
पर्चा रद्द होने की जानकारी सुबह 10 बजे के बाद उस समय सामने आई जब छात्रों को परीक्षा हाल में पेपर बंट चुका था। वे अनेक सवालों के जवाब ओएमआर शीट में भर चुके थे। बीच परीक्षा में उन्हें बताया गया कि परीक्षा कैंसिल कर दी गई है। हालांकि, कई सेंटर्स पर परीक्षा रद्द होने की जानकारी नहीं पहुंची थी और वहां अभ्यर्थी परीक्षा दे रहे थे।
कई लोगों की गिरफ्तारी
छापेमारी के दौरान कई लोगों को गिरफ्तार किया गया और परीक्षा शुरू होने से पहले ही वॉट्सऐप पर प्रश्न पत्र लीक होने की पुष्टि की।
इस मामले में मनीष उर्फ मोनू पुत्र देवेंद्र मालिक कोतवाली शामली, रवि पुत्र विनोद निवासी कांधला और धर्मेन्द्र पुत्र कुंवर पाल निवासी कोतवाली शामली को पेपर के साथ शामली से गिरफ्तार किया गया था। ये तीनों अभ्यर्थियों को पेपर देने जा रहे थे। इसके साथ ही 23 लोग गिरफ्तार किए गए थे।
परीक्षा निरस्त होने के बाद लॉ एंड ऑर्डर, एडीजी प्रशांत कुमार ने बयान जारी करते हुए कहा था कि आज होने वाली UPTET 2021 की परीक्षा कथित पेपर लीक के कारण रद्द कर दी गई है। पेपर लीक मामले में एसटीएफ ने दर्जनों संदिग्धों को हिरासत में लिया, जांच जारी है। यूपी सरकार एक महीने के भीतर दोबारा परीक्षा कराएगी।
पहली बार लाइव सीसीटीवी सर्विलांस की व्यवस्था थी
टीईटी में पहली बार लाइव सीसीटीवी सर्विलांस की व्यवस्था की गई थी। इसका मकसद हर हाल में बिना नकल के परीक्षा कराना था, हालांकि इस दावे की धज्जियां महज घंटे भर के अंदर उड़ गईं। इसे हर परीक्षा केंद्र पर एक्टिव किया गया था। इसकी मॉनिटरिंग लखनऊ में हो रही थी। दावा किया गया था कि यदि किसी भी परीक्षा केंद्र पर किसी तरह की गड़बड़ी की गई तो वह फौरन पकड़ में आ जाएगी। हालांकि, इस सब से पहले ही परीक्षा का पर्चा लीक होने से उसे कैंसिल करना पड़ा।
सीएम योगी ने दिखाई सख्ती
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने टीईटी की परीक्षा लीक मामले को काफी गंभीरता से लेते हुए आरोपियों के खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट के तहत मुकदमा, उनकी संपत्ति जब्त कराने और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। साथ ही उन्होंने परीक्षार्थियों को राहत देते हुए आई कार्ड दिखाकर उत्तर प्रदेश परिवहन निगम की बसों में फ्री में आने-जाने की सुविधा देने के निर्देश दिए थे। इसके अलावा अभ्यर्थियों से दुबारा परीक्षा के लिए कोई भी अतिरिक्त शुल्क नहीं लेने की बात कही थी।