फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Manipur Violence: पहाड़ी इलाके में बिजली के खंभे-GI पाइप से बनाई गईं बंदूकें, तलाशी अभियान के दौरान हुआ खुलासा

Sun, 16 Jul 2023 02:23 PM IST
देव कश्यप पीटीआई, सुगनू (मणिपुर)।

सार

दक्षिणी मणिपुर के काकचिंग जिले में स्थित अधिकारियों ने कहा कि पहाड़ी समुदाय के लोग पारंपरिक रूप से शिकारी हैं और घातक हथियार बनाने और उसे ठीक की क्षमता रखते हैं।
विज्ञापन
इलाके में तैनात पुलिस के जवान (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : ANI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मणिपुर में पुलिस शस्त्रागारों से लूटे गए हथियारों को बरामद करने के लिए चलाए गए तलाशी अभियान के दौरान एक बड़ा खुलासा हुआ है। मणिपुर के पहाड़ी इलाके में तलाशी के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा जब्त किए गए हथियारों का एक बड़ा हिस्सा उखाड़े गए बिजली के खंभों या गैल्वनाइज्ड लोहे (जीआई) पाइपों से बनी बंदूकें थीं। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इन बंदूकों के अलावा, पहाड़ी इलाकों से संघर्षरत समूह के शस्त्रागार में एके और इंसास राइफल जैसे अन्य हथियार मौजूद हैं।

विज्ञापन


दक्षिणी मणिपुर के काकचिंग जिले में स्थित अधिकारियों ने कहा कि पहाड़ी समुदाय के लोग पारंपरिक रूप से शिकारी हैं और घातक हथियार बनाने और उसे ठीक की क्षमता रखते हैं। हाल ही में, यहां के दूरदराज के गांवों के साथ-साथ पड़ोसी चुराचांदपुर जिले में भी कुछ बिजली के खंभे गायब और पानी के पाइप उखड़े हुए पाए गए थे।

अधिकारियों ने कहा, यह इस बात के पर्याप्त संकेत हैं कि इनका इस्तेमाल हथियार बनाने में किया गया और झड़प के दौरान दूसरे समुदाय पर गोली चलाने के लिए इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा, यह समुदाय परंपरागत रूप से तलवार, भाले, धनुष और तीर का उपयोग करता था। बाद में उन्होंने देसी बंदूकों और गोलियों का उपयोग करना शुरू कर दिया, जिन्हें 'थिहनांग' भी कहा जाता है।
विज्ञापन


उखाड़े गए बिजली के खंभों का उपयोग देसी तोप बनाने के लिए किया गया, जिसे 'पम्पी' या 'बम्पी' भी कहा जाता है, जो स्क्रैप आयरन और अन्य धातु की वस्तुओं से भरी होती है और गोलियों या छर्रों के रूप में काम करती हैं। अधिकारियों ने कहा कि इनका निर्माण ग्रामीण लोहारों द्वारा किया जाता है, जिन्हें 'थिह-खेंग पा' कहा जाता है। ये अक्सर अपने समुदाय की रक्षा के लिए मुफ्त में सेवा देते हैं।

बता दें कि तीन मई को हुई मैतेई और कुकी समुदायों के बीच जातीय झड़पों की पृष्ठभूमि में सुरक्षा बल राज्य में हिंसा को रोकने के लिए नागरिक अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहे हैं। इस हिंसा में 160 से अधिक लोगों की जान चली गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें