सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ लेने के लिए आधार कार्ड को अनिवार्य बनाए जाने पर सपाए टीएमसीए जदयू और बीजेडी ने दोनों सदनों में जम कर हंगामा किया। इन दलों के सांसदों ने आरोप लगाया कि आधार को अनिवार्य बनाए जाने के कारण बड़ी संख्या में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन कर रहे लोग सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ नहीं उठा पा रहे।
सदस्यों ने सरकार पर इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों के उल्लंघन का भी आरोप लगाया। सदस्यों का कहना था कि सरकार को सुप्रीम कोर्ट की आधार को वैकल्पिक पहचान पत्र के तौर पर मान्यता देना चाहिए। राज्यसभा में हंगामें के चलते शून्य काल और प्रश्न काल की कार्यवाही नहीं चल सकी।
शून्यकाल के दौरान टीमएसी के कल्याण बनर्जी ने कहा कि उत्तर प्रदेश, बिहार पश्चिम बंगाल और उड़ीसा के करोड़ों परिवार आधार को अनिवार्य बनाए जाने के कारण सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं उठा पा रहे। उन्होंने कहा कि अगले पश्चिम बंगाल में ही एक करोड़ लोगों के पास आधार कार्ड नहीं है।
इसके अलावा अन्य राज्यों में भी करोड़ों लोग आधार कार्ड से वंचित हैं। बनर्जी ने कहा कि इस मामले में सरकार जबर्दस्ती पर उतारू है। सुप्रीम कोर्ट भी कह चुका है कि आधार कार्ड को अनिवार्य पहचान पत्र नहीं बनाया जा सकता।
मगर सरकार ने अपनी 17 योजनाओं को आधार से जोड़ दिया है। उन्होंने सौ फीसदी आधार कार्ड बनने के बाद ही इसे अनिवार्य बनाने की सलाह दी। सपा के धर्मेंद्र यादवए जदयू के बूलो महतो सहित बीजेडी के कई सांसदों ने भी इस मामले में अपनी नाराजगी जाहिर की।
उच्च सदन में वरिष्ठ मंत्री वेंकैयानायडू ने कहा कि जबतक सभी नागरिकों का आधार कार्ड नहीं बन जाता इस अनिवार्य नहीं किया जाएगा। लेकिन विरोध में उतरे सांसदों ने उनकी एक नहीं सुनी और सभापित के आसन तक पहुंच नारेबाजी करने लगे। विपक्ष सरकार से सभी काम रोक कर इस मुद्दे पर चर्चा की मांग कर रहे थे।