फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

यूपीः दलितों का बनाया खाना खाने से इंकार कर रहीं गर्भवती महिलाएं और स्कूली बच्चे

Fri, 05 Aug 2016 04:54 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
demo pic
विज्ञापन
दलितों पर अत्याचारों को लेकर चल रही बहस के बीच उत्तर प्रदेश से भी कुछ ऐसी खबरे आई हैं जो इस बहस को और बढ़ा देती हैं कि छुआछूत और जुल्म का ये सिलसिला कब खत्म होगा। 
विज्ञापन


जानकारी के अनुसार प्रदेश सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं के लिए चलाई जा रही हौसला पोषण योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को दिया जा रहा पौष्टिक भोजन लेने से उच्च जाति की महिलाओं ने यह कहकर इंकार कर दिया कि यह अछूत लोगों के हाथों से दिया जा रहा है। इसके अलावा कई स्कूलों में मिड डे मील को खाने से उच्च जाति के बच्चे इसलिए इंकार कर रहे हैं कि यह दलित जाति के रसोइया द्वारा बनाया गया है। 

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के अनुसार छुआछूत के यह ज्यादातर मामले सामने आए हैं वेस्ट यूपी के जिलों से। जहां यूपी सरकार द्वारा गर्भवती महिलाओं के लिए चलाई जा रही महत्वाकांक्षी 'हौसला पोषण योजना' जातिवाद के दंश के चलते परवान नहीं चढ़ पा रही है। 
विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

वेस्ट के कई जिलों में भोजन का बहिष्कार कर रही महिलाएं और बच्चे

demo pic
अधिकारियों की मानें तो वेस्ट के कई जिलों में यह योजना छूआछूत का शिकार हो रही है जहां उच्च जाति की गर्भवती महिलाएं आंगनबाड़ी में काम करने वाली दलित महिलाओं के हाथों से यह भोजन लेने से इंकार कर रही हैं। 

20 जून से शुरू हुई यह योजना चार चरणों में लागू होनी थी। जिसमें गर्भवती महिलाओं और कुपोषित बच्चों को पोषक भोजन और एक फल दिया जाना था। पीलीभीत के जिला कार्यक्रम अधिकारी राजकपूर ने बताया कि अमरिया ब्लॉक के धनकुना गांव में 18 से ज्यादा महिलाओं ने गुरुवार को यह कहकर पोषित भोजन लेने से इंकार कर दिया कि यह आंगनवाड़ी केंद्र की इंचार्ज अछूत महिला द्वारा बनाया गया है। 

इसी तरह के एक अन्य घटनाक्रम में बारखेडा दौलतपुर रोड पर बने एक प्राइमरी स्कूल में छह बच्चों ने यह कहकर मिड डे मील खाने से इंकार कर दिया कि यह एक दलित महिला रसोईया के द्वारा बनाया गया है। 

अधिकारियों का कहना है कि ऊंची जाति के लोग दलितों द्वारा बनाए गए भोजन का एकमुश्त बहिष्कार का यह पहला उदाहरण है। अधिकारियों के अनुसार आगरा से भी इसी तरह मिड डे मील और पोषक भोजन का बहिष्कार करने के मामले सामने आए हैं।
दलितों के हाथ का भोजन खाने से मना करने वालों के खिलाफ क्या कोई कार्रवाई होनी चाहिए?
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें