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UPI यूजर्स ध्यान दें: 2 अक्टूबर को यूपीआई से पेमेंट नहीं लेंगे कारोबारी? जानें 0.4% चार्ज से क्या है कनेक्शन

Thu, 24 Sep 2026 05:51 PM IST
राहुल कुमार डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देशभर के कारोबारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को विरोध का फैसला लिया गया है। इस विरोध प्रदर्शन में 500 से ज्यादा कारोबारी संगठन जुड़े है। विस्तार से पढ़ें पूरा मामला...
 
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- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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देशभर के कारोबारी और व्यापारी संगठन गांधी जयंती वाले दिन यानी दो अक्टूबर को 'नो यूपीआई डे' मनाएंगे। यह विरोध 15 अक्टूबर से दो हजार रुपये से अधिक के यूपीआई लेनदेन पर प्रस्तावित 0.4 फीसदी मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) के खिलाफ होगा। व्यापारी संगठनों की मांग है कि यह शुल्क नहीं लगाया जाए। विरोध के दौरान कारोबारी यूपीआई क्यूआर कोड, स्कैनर, साउंड बॉक्स और डिजिटल भुगतान से जुड़े अन्य उपकरणों को काले कपड़े से ढक कर विरोध दर्ज करवाएंगे।

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इस विरोध प्रदेश में महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (एमसीसीआईए), ऑल इंडिया कंज्यूमर प्रोडक्ट्स डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन (एआईसीपीडीएफ), अखिल भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ, ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्डस्मिथ फेडरेशन, ऑल इंडिया मोबाइल रिटेलर्स एसोसिएशन (एआईएमआरए) और फेडरेशन ऑफ रिटेल ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन ने विरोध में शामिल होने की पुष्टि की है।

एमसीसीआईए के अध्यक्ष रविंद्र माणगावे ने कहा, देशभर के कारोबारी संगठनों से बातचीत के बाद 2 अक्टूबर को विरोध का फैसला लिया गया है। इस विरोध प्रदर्शन में हमारे साथ करीब 500 कारोबारी संगठन जुड़े हैं। महाराष्ट्र में एमसीसीआईए और करीब 500 संगठन मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी मांग रखेंगे। केंद्र स्तर पर इन्हें वित्त मंत्री के सामने उठाया जाएगा।
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एआईसीपीडीएफ के राष्ट्रीय अध्यक्ष धैर्यशील पाटिल ने कहा, डिजिटल भुगतान की अतिरिक्त लागत का बोझ केवल कारोबारियों पर नहीं डाला जाना चाहिए। खुदरा कारोबारी और वितरक कम मार्जिन पर काम करते हैं। यूपीआई पर एमडीआर लगने से उनकी लागत बढ़ेगी। भारतीय खाद्य तेल व्यापारी महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शंकर ठक्कर ने कहा कि विरोध के तहत यूपीआई स्कैनर, क्यूआर कोड, साउंड बॉक्स और अन्य संबंधित उपकरणों को काले कपड़े से ढका जाएगा।

इस बीच, भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडेय ने कहा था कि यूपीआई के जरिये बड़े फंड ट्रांसफर पर प्रस्तावित एमडीआर को लेकर शेयर ब्रोकरों की चिंताओं पर नियामक विचार करेगा। पूंजी बाजार से जुड़े लेनदेन के लिए एमडीआर 0.02 फीसदी तय किया गया है। यह शुल्क म्युचुअल फंड, ब्रोकर, डीलर और निवेश सलाहकारों को किए जाने वाले भुगतान पर लगेगा। इसकी अधिकतम सीमा 300 रुपये होगी।

मर्चेंट डिस्काउंट रेट क्या होता है?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर वह शुल्क है, जो दुकानदार या व्यापारी डिजिटल भुगतान की सुविधा लेने के लिए बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देता है। यह शुल्क डेबिट-क्रेडिट कार्ड, पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन, पेमेंट गेटवे या अन्य डिजिटल भुगतान माध्यमों पर लिया जा सकता है। एमडीआर के जरिए डिजिटल भुगतान से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर और लेनदेन की लागत की भरपाई की जाती है। यह शुल्क ग्राहक से नहीं, बल्कि व्यापारी से लिया जाता है।

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