सीबीआई और उपहार हादसा पीड़ित एसोसिएशन(एवीयूटी) की पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट ने सुशील ओर गोपाल अंसल को नोटिस जारी किया है। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अंसल बंधुओं को इस दौरान देश से बाहर जाने पर मना किया है।
न्यायमूर्ति रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अंसल बंधुओं को नोटिस जारी करते हुए कहा कि पुनर्विचार याचिका पर 14 दिसंबर को बहस होगी। उपहार हादसा पीड़ित एसोसिएशन ने अपनी पुनर्विचार याचिका में कहा कि अदालत का फैसला नेचुरल जस्टिस केखिलाफ है।
पीड़ित पक्ष को अपना पक्ष प्रभावी तरीके रखने का मौका नहीं मिला। शीर्ष अदालत को दोषियों के प्रति उदारता नहीं दिखानी चाहिए थी क्योंकि उनके द्वारा किया गया अपराध गंभीर है। बिना किसी आधार या तर्क के कैद की सजा को जुर्माने में तब्दील कर दिया।
वहीं सीबीआई ने अपनी पुनर्विचार याचिका में कहा कि शीर्ष अदालत ने एजेंसी को अपना नजरिया व्यक्त करने का समय नहीं दिया, जिस कारण इस मामले में न्याय नहीं हो सका। एजेंसी ने अपनी याचिका में कहा जिस दिन इस मामले की सुनवाई हो रही थी, उस दिन समय का अभाव होने के कारण अभियोजन पक्ष सही तरीकेसे अपने तर्क पेश करने में नाकाम रहा। बहस इस बात को लेकर हो रही थी कि अदालत को कैद की सजा को जुर्माने में तब्दील करना चाहिए या नहीं?
मालूम हो कि गत 19 अगस्त को न्यायमूर्ति अनिल आर दवे की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने उपहार अग्निकांड में दोषी सुशील और गोपाल अंसल द्वारा जेल में बिताए गए समय को ही सजा करार दिया था। पीठ ने दोनों भाई को तीन महीने के भीतर 30-30 करोड़ रुपये का जुर्माना किया था।
जुर्माने की रकम न भरने की स्थिति में दोनों को दो वर्ष जेल में बिताने का आदेश दिया गया था। असंल बंधुओं ने तय समय केभीतर जुर्माना भर दिया था। मालूम हो कि सुशील अंसल करीब पांच महीने और गोपाल अंसल चार महीने जेल में बिता चुके हैं।