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केंद्रीय मंत्रिमंडल से कुशवाहा का इस्तीफा, 1985 में लेक्चरर से बने थे नेता

Mon, 10 Dec 2018 03:53 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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उपेंद्र कुशवाहा - फोटो : Facebook
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राष्ट्रीय लोक समता पार्टी (रालोसपा) के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने सोमवार 10 दिसंबर को अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। वह लोकसभा चुनाव से कुछ महीने पहले मोदी सरकार से अलग हो गए हैं। माना जा रहा है कि इससे बिहार में राजनीतिक समीकरण बदल सकते हैं। रालोसपा प्रमुख पिछले कुछ समय से भाजपा और उसके अहम सहयोगी दल के नेता और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर निशाना साधते रहे हैं।

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आगामी लोकसभा चुनाव से पहले बिहार से उन्हें केवल दो सीटे मिली थीं जिसकी वजह से वह नाराज चल रहे थे। इस बारे में उन्होंने भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का समय मांगा था ताकि सीट बंटवारे पर चर्चा हो सके और वह अपनी नाराजगी जाहिर कर पाएं, लेकिन उन्हें समय नहीं मिला। इससे नाराज कुशवाहा राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से नाता तोड़ सकते हैं।

6 फरवरी 1960 को उपेंद्र कुशवाहा का जन्म बिहार वैशाली के जावज में हुआ था। उनके पिता का नाम स्वर्गीय मुनेश्वर सिंह और माता का नाम श्रीमती मुनेश्वरी देवी है। उनकी पत्नी का नाम श्रीमती स्नेहलता कुशवाहा है। उनका एक बेटा और एक बेटी है। वर्तमान में वह कराकट से लोकसभा सांसद हैं। उनकी शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने पटना के पटना साइंस कॉलेज से राजनैतिक विज्ञान से एमए किया है। 
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राजनीतिक करियर

1985 में राजनीति में आने से पहले वह जंदाहा के वैशाली के समता कॉलेज में लेक्चरर के तौर पर पढ़ाया करते थे। अब इस कॉलेज का नाम मुनेश्वर सिंह मुनेश्वरी समता कॉलेज है। 1985-88 तक वह युवा लोक दल के राज्य महासचिव रहे। इसके बाद 1988-93 तक वह युवा जनता दल के राष्ट्रीय महासचिव रहे। 1994-2002 तक वह समता पार्टी के राज्य महासचिव रहे। 

2002-2004 के बीच वह बिहार विधानसभा में समता पार्टी के उपनेता रहे। 2004-05 के बीच वह बिहार विधानसभा में समता पार्टी के और विपक्ष के नेता रहे। 2010-13 के बीच वह राज्यसभा सांसद रहे। 3 मार्च, 2014 को उन्होंने राष्ट्रीय लोक समता पार्टी की स्थापना की। बिहार के ऐतिहासिक गांधी मैदान में हुई रैली में उन्होंने अपनी पार्टी के नाम और झंडे का अनावरण किया था।

2014 में उन्होंने राष्ट्रीय समता पार्टी से चुनाव लड़ा और कराकट से 16वीं लोकसभा के लिए चुने गए। वह एनडीए के घटक दलों में शामिल थे। पीएम मोदी के नेतृत्व में बनी भाजपा सरकार में उन्हें मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री बनाया गया। वह 9 दिसंबर, 2018 तक इस पद पर कायम रहे। अटकलें तेज हैं कि वह विपक्ष के महागठबंधन में शामिल हो सकते हैं इसी वजह से उन्होंने भाजपा का साथ छोड़ दिया है।

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