उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की भर्तियों की प्रारंभिक परीक्षाओं में गलत जवाब को लेकर लगातार सवाल उठने के बाद मुख्य परीक्षा में भी ‘आंसर की’ जारी करने की मांग मुखर हो गई है। इससे आयोग को कई बार रिजल्ट संशोधित करने पड़े।
प्रतियोगियों के मुताबिक मुख्य परीक्षा में भी गलत जवाब को सही माने जाने की शिकायत है। उनकी मांग है कि आयोग मुख्य परीक्षा की ‘आंसर की’ जारी करे तो स्थिति और स्पष्ट हो जाएगी। अब इस मांग को लेकर नए सिरे से आंदोलन की तैयारी है।
प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति और भ्रष्टाचार मुक्ति मोर्चा की ओर से आयोग को इस बाबत ज्ञापन सौंपा गया था। ऐसे विवाद उठने के बाद आयोग की ओर से मुख्य परीक्षा में वस्तुनिष्ठ आधारित प्रश्नपत्र की जगह विस्तृत उत्तरीय पेपर बनाए जाने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया लेकिन अब तक उस पर कोई निर्णय नहीं लिया जा सका है।
गलत जवाब का मुद्दा बार-बार अदालत में जाने की वजह से आयोग के अफसर भी कुछ बोलने से बच रहे हैं। अध्यक्ष प्रोफेसर अनिरुद्ध यादव का कहना है कि परीक्षा तथा अन्य व्यवस्था में सुधार के साथ अभ्यर्थियों की शिकायतें कम करने की भी कोशिश की जा रही है।
हालिया विवाद स्वरुप पीसीएस-जे 2015 प्रारंभिक परीक्षा के दो सवालों के जवाब पर अभ्यर्थियों ने आपत्ति जताई थी। अभ्यर्थियों के पक्ष को हाईकोर्ट ने भी सही माना और संशोधित परिणाम घोषित करने का आदेश दिया जबकि इस भर्ती की मुख्य परीक्षा का परिणाम घोषित होने के साथ ही साक्षात्कार भी हो चुका है।
ऐसे में आयोग ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने अंतरिम आदेश में चार पद सुरक्षित रखकर रिजल्ट घोषित करने का आदेश दिया और सुनवाई जारी है।
इसी तरह सेे पीसीएस-2016 प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को भी अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में चुनौती दी है। इसमें एक दर्जन से अधिक प्रश्नों के जवाब को अभ्यर्थियों ने गलत बताया है। इसमें भी बहस जारी है। सोमवार को फिर सुनवाई की उम्मीद है।