कांग्रेस अपने परंपरागत और पार्टी से दूर हुए दलित मतदाताओं के करीब जाएगी। कांग्रेस दलितों के द्वार पर जाकर उन्हें बताएगी कि कांग्रेस सरकारों में ही इस वर्ग को महत्व मिला है। इस काम का जिम्मा सांसद पी एल पुनिया को सौंपा गया है। उन्हीं के नेतृत्व में कांग्रेस राज्य के करीब 66 जिलों में आने वाले दलित बहुल 2800 गांवों मे जाएगी।
कांग्रेस ने यूपी में शहरी क्षेत्रों से अधिक ग्रामीण इलाकों पर फोकस किया है। पार्टी उपाध्यक्ष राहुल गांधी की किसान महायात्रा के बाद पार्टी ने रणनीति के तहत दलित बहुल गांवों की पहचान कर वहां दस्तक देने की तैयारी की है। राज्य में करीब 2800 गांव ऐसे हैं, जहां बड़ी संख्या में दलित परिवार रहते हैं।
चार दिसंबर से पार्टी के नेता इन्हीं गांवों का दौरा करेंगे। गांवों के लिए टीमें इस तरह से तैयार की जा रही हैं कि कार्यक्रम 45 दिनों में पूरा किया जाएगा।
पार्टी दलितों के बीच यह साबित करना चाहती है कि कांग्रेस और उनका संबंध पुराना है। पार्टी के नेताओं की टीमें तैयार की जा रही हैं, जो पूरे दिन संबंधित गांव में रहेंगी। पूरा दिन गांवों में बिताने के साथ पार्टी वहां के लोगों के साथ घुल-मिल कर उनकी समस्याओं को जानेगी। उन्हें पार्टी से क्या अपेक्षा है और आखिर पार्टी ने कहां चूक की, जिससे दलित और पार्टी के बीच दूरी बढ़ी।
कांग्रेस उन कारणों को जानकर और उनकी भागीदारी के साथ ही संबंधित विधानसभा में उम्मीदवारी पर भी चर्चा करेगी। पूरा दिन साथ बिताने के दौरान पार्टी नेता ये बताने का प्रयास करेंगे कि किस तरह राहुल गांधी लंबे समय से देश भर में दलितों पर होने वाले अत्याचार और उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाते रहे हैं और उनके सुख-दुख में भागीदार बने हैं।