सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश के अधिकारी अदालत का सम्मान नहीं करते और इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों के खिलाफ उनका सुप्रीम कोर्ट पहुंचना रूटीन बन गया है। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण की पीठ ने नोएडा की मुख्य कार्यकारी अधिकारी रितु माहेश्वरी की याचिका पर यह टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने माहेश्वरी के खिलाफ अवमानना के एक मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की ओर से जारी गैर जमानती वारंट और पेशी के खिलाफ दायर उनकी याचिका पर अंतरिम आदेश पारित करने से फिलहाल इनकार किया।
भूमि अधिग्रहण से संबंधित अवमानना मामले में अदालत में पेश न होने पर गत बृहस्पतिवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था। हाईकोर्ट ने पुलिस को माहेश्वरी को गिरफ्तार कर 13 मई को अगली सुनवाई में अदालत में पेश करने का निर्देश दिया था।
माहेश्वरी के वकील ने सोमवार को जस्टिस रमण की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष याचिका का उल्लेख करते हुए अंतरिम राहत की मांग करते हुए जल्द सुनवाई की गुहार लगाई। जिस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर आप हाईकोर्ट के आदेश का पालन नहीं करतीं तो आपको इसका नतीजा झेलना होगा। उन्हें हाईकोर्ट में पेश होने दिया जाए। वकील ने कहा कि उनके दो बच्चे हैं। जवाब में चीफ जस्टिस ने कहा, आप हाईकोर्ट से आग्रह कीजिए।
चीफ जस्टिस ने कहा कि हर दूसरे दिन कुछ अधिकारी गंभीर मामलों में भी निर्देश के लिए कोर्ट आ जाते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हर रोज इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेशों का उल्लंघन होता है। यह दिनचर्या हो गई है। हर रोज़ एक अधिकारी कोर्ट आ जाता है, यह क्या है? आप अदालत के आदेश का सम्मान नहीं करते। हालांकि बाद में पीठ ने कहा कि वह याचिका को सूचीबद्ध करने पर विचार करेंगे।
हमारा लोकतंत्र आम आदमी के विश्वास पर टिका: सुप्रीम कोर्ट
वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने कलकत्ता हाईकोर्ट के कोंटाई नगर निगम चुनावों के सीसीटीवी फुटेज का फोरेंसिक ऑडिट कराने वाले आदेश पर रोक लगाते हुए कहा, हमारा लोकतंत्र आम आदमी के विश्वास पर टिका है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल राज्य चुनाव आयोग को कोंटाई नगर निगम के चुनावों के सीसीटीवी फुटेज केंद्रीय फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी को सौंपने का निर्देश दिया था। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ और जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने कोंटाई नगर पालिका के पूर्व अध्यक्ष सुमेंदु अधिकारी की जनहित याचिका पर आगे की कार्यवाही पर भी रोक लगा दी। पीठ ने अधिकारी को हाईकोर्ट में उसकी याचिका वापस लेने को कहा है। पीठ ने हाईकोर्ट के 26 अप्रैल को आए आदेश पर रोक के साथ ही अधिकारी व अन्य को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।