पहले चुनाव के नतीजे जान लीजिए
यूपी में नगर निगम की 17 सीटें हैं। इनमें से 10 के नतीजे आ चुके हैं और इन सभी पर भारतीय जनता पार्टी की जीत हुई है। अन्य सात सीटों पर भी भाजपा के प्रत्याशी भारी मतों से आगे चल रहे हैं। मतलब इन सीटों पर भी एक तरह से जीत सुनिश्चित है।
इसके अलावा निगम पार्षद की सूबे में कुल 1420 सीटें हैं। अब तक 1327 सीटों के नतीजे जारी हो चुके हैं। इनमें सबसे ज्यादा 763 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों को जीत मिली है। समाजवादी पार्टी के 180, बसपा के 82 और कांग्रेस के 70 प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। छह सीटों पर आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार भी चुनाव जीतने में कामयाब हुए हैं। इसके अलावा 10 सीटों पर असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम और नौ पर आरएलडी के उम्मीदवार चुनाव जीत गए। 199 निर्दलीय प्रत्याशी चुनाव जीते।
सूबे में 199 नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पद पर चुनाव हुए थे। इनमें से 56 के परिणाम जारी हो चुके हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो इन 56 में से 27 पर भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवारों की जीत हुई है। समाजवादी पार्टी के 10, बसपा और आरएलडी के तीन-तीन उम्मीदवार चुनाव जीतने में कामयाब हुए। कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के एक-एक प्रत्याशी भी चुनाव जीत गए।
अब नगर पालिका परिषद सदस्यों की बात करें तो सूबे में कुल 5327 सीटों पर चुनाव हुए थे। इनमें से 3207 के नतीजे आ चुके हैं। आंकड़ों को देखें तो इन 3207 प्रत्याशियों में 768 भाजपा के हैं। सपा के 235, बसपा के 105, कांग्रेस के 64, आरएलडी के 20, एआईएमआईएम के 19 और आम आदमी पार्टी के 17 उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। कम्युनिस्ट पार्टी के पांच, ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लाक और राष्ट्रीय जनता दल के एक-एक उम्मीदवार चुनाव जीते। सबसे ज्यादा 1965 निर्दलीय प्रत्याशियों की जीत हुई।
नगर पंचायत अध्यक्ष के 544 सीटें हैं। इनमें से 252 सीटों के परिणाम आ चुके हैं। भाजपा ने सबसे ज्यादा 99 सीटों पर जीत हासिल की है। समाजवादी पार्टी के 35, बसपा के 12, कांग्रेस के छह, आम आदमी पार्टी और आरएलडी के तीन-तीन प्रत्याशियों ने चुनाव जीता। एक पर एआईएमआईएम के प्रत्याशी की जीत हुई। 92 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार जीत गए। नगर पंचायत सदस्यों की 7177 सीटों में से अब तक 4769 के नतीजे आ चुके हैं। इनमें से 964 सीटों पर भाजपा उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है। सपा के 325, बसपा के 135, कांग्रेस के 52, आम आदमी पार्टी के 51, आरएलडी के 27 और एआईएमआईएम के 13 प्रत्याशियों की जीत हुई। ऑल इण्डिया फारवर्ड ब्लाक के चार, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल के दो-दो उम्मीदवारों ने भी सफलता हासिल की। 3177 निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव जीतने में कामयाब हुए हैं।
नतीजों का ओवरऑल समीकरण किसके पाले में?
निकाय चुनाव के नतीजों का ओवरऑल विश्लेषण किया जाए तो भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी जीत हासिल की है। 2017 के मुकाबले भाजपा का प्रदर्शन काफी बेहतर हुआ है। 2017 में नगर निगम की 16 सीटें थीं। इनमें से 14 पर भाजपा को जीत मिली थी, जबकि दो पर बहुजन समाज पार्टी के प्रत्याशी ने सफलता हासिल की थी। इस बार नगर निगम महापौर की एक सीट बढ़ गई है, मतलब 17 सीटों पर चुनाव हुए थे और सभी पर भाजपा को जीत मिली है।
पिछली बार पार्षद पद के 1300 सीटों पर चुनाव हुए थे और इनमें से 596 पर भाजपा को जीत मिली थी। इस बार 1420 में से 763 सीटें भाजपा के खाते में जा चुकी हैं। इसी तरह नगर पालिका अध्यक्ष, नगर पालिका परिषद सदस्य, नगर पंचायत अध्यक्ष और नगर पंचायत सदस्यों के चुनाव में भी भाजपा ने अच्छा प्रदर्शन किया था। हालांकि, पिछली बार के मुकाबले भाजपा के प्रदर्शन में जबरदस्त इजाफा हुआ है।
निकाय चुनाव के नतीजों के सियासी मायने क्या हैं?
इसे समझने के लिए हमने यूपी के वरिष्ठ पत्रकार रमाशंकर श्रीवास्तव से बात की। उन्होंने कहा, 'भाजपा को आज कर्नाटक में बुरी हार झेलनी पड़ी है। अगले साल देश में लोकसभा चुनाव होने हैं। इसके पहले कर्नाटक में मिली हार भाजपा के लिए बड़ा झटका है। हालांकि, यूपी निकाय चुनाव के नतीजों ने भाजपा के घाव पर काफी हद तक मरहम लगाने का काम किया है। यूपी में लोकसभा की 80 सीटें हैं। कर्नाटक में लोकसभा की 28 सीटें हैं। दोनों जगह ही 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने काफी अच्छा प्रदर्शन किया था। ऐसे में अगर इस बार कर्नाटक में कुछ हालात बदलते हैं तो यूपी के नतीजे उसे कवर कर सकते हैं। पिछली बार यूपी में 62 सीटें मिली थीं। हालांकि, बाद में आजमगढ़ और रामपुर की सीट भी भाजपा के खाते में आ गई। इस बार निकाय चुनाव बताते हैं कि पार्टी की स्थिति में काफी सुधार हुआ है। ऐसे में संभव है कि लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा की सीटों में कुछ बढ़ोतरी हो जाए। पार्टी की कोशिश भी यही रहेगी।'
श्रीवास्तव ने आगे कहा, 'जहां, भाजपा के लिए ये चुनाव के नतीजे राहत का संदेश दे रहे हैं, वहीं सपा, बसपा और कांग्रेस के दिलों की धड़कन भी बढ़ा रहे हैं। इसके अलावा इन नतीजों में एक चीज और सामने आई है। वह आम आदमी पार्टी की बड़ी एंट्री। आम आदमी पार्टी ने नगर पंचायत स्तर से लेकर पार्षद स्तर तक के चुनावों में काफी सीटें जीती हैं। संभव है कि अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के दौरान पार्टी और ताकत के साथ मैदान में उतरे। अगर ऐसा होता है तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान सपा, बसपा और कांग्रेस को ही उठाना पड़ेगा। आम आदमी पार्टी ने दिल्ली छोड़कर अभी तक जहां भी सफलता हासिल की है, वहां सबसे ज्यादा नुकसान विपक्षी दल को ही हुआ है।'