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यूपी विधान परिषद चुनाव: दो सीटों पर चार उम्मीदवार, जानें भाजपा-सपा में कौन मजबूत; आंकडे़ क्या कहते हैं?

स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु मिश्रा Updated Fri, 19 May 2023 05:24 PM IST

सार

सवाल ये है कि आखिर भाजपा और सपा प्रत्याशियों में किसकी दावेदारी कितनी मजबूत है? आंकड़े क्या कहते हैं? विधान परिषद के इन दो सदस्यों का चुनाव कैसे होगा? आइए जानते हैं... 
 
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यूपी विधान परिषद - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की रिक्त दो सीटों पर चुनाव होने हैं। इन दो सीटों के लिए चार उम्मीदवारों ने नामांकन किया है। इनमें दो भारतीय जनता पार्टी के हैं और दो समाजवादी पार्टी से हैं। भाजपा ने पदमसेन चौधरी और मानवेंद्र सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं, सपा की तरफ से रामकरन निर्मल और रामजतन राजभर ने नामांकन किया है। ये सीटें भाजपा के विधान परिषद सदस्य रहे लक्ष्मण प्रसाद आचार्य के सिक्किम के राज्यपाल बनने और बनवारी लाल के निधन के बाद खाली हुई हैं। 

सवाल ये है कि आखिर भाजपा और सपा प्रत्याशियों में किसकी दावेदारी कितनी मजबूत है? आंकड़े क्या कहते हैं? विधान परिषद के इन दो सदस्यों का चुनाव कैसे होगा? आइए जानते हैं... 

 
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यूपी विधान परिषद - फोटो : अमर उजाला
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की रिक्त दो सीटों पर चुनाव होने हैं। इन दो सीटों के लिए चार उम्मीदवारों ने नामांकन किया है। इनमें दो भारतीय जनता पार्टी के हैं और दो समाजवादी पार्टी से हैं। भाजपा ने पदमसेन चौधरी और मानवेंद्र सिंह को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं, सपा की तरफ से रामकरन निर्मल और रामजतन राजभर ने नामांकन किया है। ये सीटें भाजपा के विधान परिषद सदस्य रहे लक्ष्मण प्रसाद आचार्य के सिक्किम के राज्यपाल बनने और बनवारी लाल के निधन के बाद खाली हुई हैं। 

सवाल ये है कि आखिर भाजपा और सपा प्रत्याशियों में किसकी दावेदारी कितनी मजबूत है? आंकड़े क्या कहते हैं? विधान परिषद के इन दो सदस्यों का चुनाव कैसे होगा? आइए जानते हैं... 
 

पहले विधान परिषद के बारे में जान लीजिए 
अभी देश के छह राज्यों में ही विधान परिषद हैं। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में 100 सीटें हैं। इसके अलावा बिहार, महाराष्ट्र, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में भी विधान परिषद अस्तित्व में है। विधान परिषद में एक निश्चित संख्या तक सदस्य होते हैं। विधानसभा के एक तिहाई से ज्यादा सदस्य विधान परिषद में नहीं होने चाहिए। मसलन यूपी में 403 विधानसभा सदस्य हैं। यानी यूपी विधान परिषद में 134 से ज्यादा सदस्य नहीं हो सकते हैं। इसके अलावा विधान परिषद में कम से कम 40 सदस्य होना जरूरी है। एमएलसी का दर्जा विधायक के ही समकक्ष होता है।

 

कैसे चुने जाते हैं विधान परिषद के सदस्य
विधान परिषद के सदस्य का कार्यकाल छह साल के लिए होता है। चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम 30 साल उम्र होनी चाहिए। एक तिहाई सदस्यों को विधायक चुनते हैं। अभी जो दो सीटें रिक्त हैं, उन पर विधायकों के जरिए ही सदस्य चुने जाएंगे। इसके अलावा एक तिहाई सदस्यों को नगर निगम, नगरपालिका, जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत के सदस्य चुनते हैं। वहीं, 1/12 सदस्यों को शिक्षक और 1/12 सदस्यों को रजिस्टर्ड ग्रैजुएट चुनते हैं। 

यूपी में विधान परिषद के 100 में से 38 सदस्यों को विधायक चुनते हैं। वहीं 36 सदस्यों को स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्र के तहत जिला पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC) और नगर निगम या नगरपालिका के निर्वाचित प्रतिनिधि चुनते हैं। 10 मनोनीत सदस्यों को राज्यपाल नॉमिनेट करते हैं। इसके अलावा 8-8 सीटें शिक्षक निर्वाचन और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के तहत आती हैं।
 

यूपी विधान परिषद - फोटो : अमर उजाला
विधानसभा में जिसके ज्यादा विधायक, उसी के ज्यादा एमएलसी चुने जाते हैं 
उच्च सदन यानी विधान परिषद में किसका दम रहेगा, यह निचले सदन यानी विधानसभा में पार्टी के सदस्यों की स्थिति पर निर्भर करता है। आमतौर पर यह चुनाव सत्ता का ही माना जाता है। पुराने रिकॉर्ड देखें तो मुलायम सिंह यादव के कार्यकाल में 2004 में हुए चुनाव में सपा 36 में 24 सीटों पर काबिज हुई थी। बसपा के पास एक भी सीट नहीं थी। 2010 में जब इन सीटों पर चुनाव हुए तो बसपा सत्ता में थी। उसने 36 में 34 सीटें जीतकर लगभग क्लीन स्वीप कर लिया था। इसके बाद फरवरी-मार्च 2016 में अखिलेश यादव के सीएम रहते चुनाव हुए तो सपा 31 सीटें जीत गई। इसमें आठ सीटों पर निर्विरोध जीत भी शामिल थी, जबकि पहले सपा केवल एक सीट जीती थी। अभी की स्थिति देखें तो 100 में से 80 सदस्य भारतीय जनता पार्टी के हैं। समाजवादी पार्टी के केवल नौ सदस्य ही एमएलसी हैं। 
 

तो किसकी दावेदारी कितनी मजबूत?
इसके लिए हमें विधानसभा में दलगत स्थिति देखनी होगी। मौजूदा समय विधानसभा में भाजपा के 255 सदस्य हैं। समाजवादी पार्टी के 109, कांग्रेस के दो, बसपा के एक, अपना दल (सोनेलाल) के 13, निषाद पार्टी के छह, रालोद के नौ, सुभासपा के छह और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के दो सदस्य हैं। भाजपा गठबंधन में अपना दल सोनेलाल और निषाद पार्टी भी है। इसके अलावा जनसत्ता दल लोकतांत्रिक, सुभासपा का भी समर्थन मिल सकता है। ऐसे में इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों की दावेदारी ज्यादा मजबूत दिख रही है।
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