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SC: आतंकी दाऊद के करीबी रहे गैंगस्टर ने की समयपूर्व रिहाई की मांग, यूपी सरकार बोली- याचिका पहले ही नकार चुके

Sun, 10 Nov 2024 03:06 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

यूपी के अतिरिक्त एडवोकेट जनरल गरिमा प्रसाद ने जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच को बताया कि गैंगस्टर को गंभीर अपराधों के मामले में दोषी पाया गया है। वह भी आतंक-रोधी कानूनों के अंतर्गत।
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योगी आदित्यनाथ, सुप्रीम कोर्ट। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि उसने गैंगस्टर बबलू श्रीवास्तव की समयपूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका को छह नवंबर को ही नकार दिया था। बबलू श्रीवास्तव का असली नाम ओमप्रकाश श्रीवास्तव है और उसे 1993 में एक अतिरिक्त कस्टम कलेक्टर की हत्या करने के मामले में कोर्ट ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। 
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यूपी के अतिरिक्त एडवोकेट जनरल गरिमा प्रसाद ने जस्टिस अभय एस. ओका और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच को बताया कि गैंगस्टर को गंभीर अपराधों के मामले में दोषी पाया गया है। वह भी आतंक-रोधी कानूनों के अंतर्गत।

उन्होंने बताया कि बबलू श्रीवास्तव की समयपूर्व रिहाई की मांग वाली याचिका को सक्षम प्राधिकारी, जो कि इस केस में राज्यपाल कार्यालय था, कि तरफ से छह नवंबर को नकारा जा चुका है।
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प्रसाद ने कहा कि श्रीवास्तव इस कोर्ट में अस्वच्छ हाथ लेकर आए हैं और उन्होंने अपनी समयपूर्व रिहाई की मांग वाली याचिकाओं की स्थितियों का खुलासा नहीं किया है। अतिरिक्त एजी ने कहा कि श्रीवास्तव हर कुछ समय में अपनी रिहाई की मांग करते रहे हैं। उनकी सबसे पहली याचिका 2016 में दायर हुई थी। 

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने 8 नवंबर को जारी आदेश में बबलू श्रीवास्तव के वकील को उनकी याचिकाओं, उनके मामलों से जुड़े आदेश और केस के रिकॉर्ड पेश करने के लिए कहा। 

कौन है गैंगस्टर बबलू श्रीवास्तव?
बबलू श्रीवास्तव एक समय कथित तौर पर अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से जुड़ा था। हालांकि, बाद में वह दाऊद का दुश्मन बन गया था। उसे जांच एजेंसियों ने सिंगापुर से पकड़ा था और 1995 में भारत प्रत्यर्पित किया था। बबलू को हत्या और अपहरण समेत दूसरे अपराधों से जुड़े 42 केस में वांछित करार दिया गया था। 

कानपुर स्थित टाडा कोर्ट ने बबलू श्रीवास्तव को पहली बार 30 सितंबर 2008 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। उसे 1993 में अतिरिक्त कस्टम अफसर एलडी अरोड़ा की इलाहाबाद में हत्या करने के मामले में दोषी पाया गया था। फिलहाल उसे बरेली सेंट्रल जेल में रखा गया है। श्रीवास्तव का कहना है कि वह 26 साल से जेल में है और उसका बर्ताव अच्छा रहा है। इसलिए यूपी सरकार की नीति के तहत उसे जेल से समयपूर्व रिहाई मिल सकती है।
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