सुप्रीम कोर्ट के रुख को भांपते हुए उत्तर प्रदेश सरकार, आजीवन कारावास की सजा काट रहे दोषियों की समय पूर्व रिहाई के अगस्त, 2021 की नीति को सैद्धांतिक तौर पर वापस लेने को तैयार हो गई है। हालांकि सरकार ने कहा, विधानसभा चुनाव के मद्देनजर इस निर्णय को तीन महीने में अमली जामा पहनाया जाएगा। यूपी सरकार ने यह जानकारी बुधवार को सुप्रीम कोर्ट को दी।
अगस्त, 2021 की नीति के तहत उम्रकैद की सजा पाए दोषियों के लिए समय पूर्व रिहाई (छूट) का आवेदन करने के लिए न्यूनतम आयु 60 वर्ष निर्धारित की गई है। पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य मामले की सुनवाई करते हुए इस नीति की वैधता पर ‘बड़ा संदेह’ व्यक्त करते हुए कहा, प्रथमदृष्टया में यह नीति टिकाऊ नही लगती है। अदालत ने यूपी सरकार को इस नीति पर चार महीने में जरूरी कदम उठाने के लिए कहा था।
यूपी की एडिशनल एडवोकेट जनरल गरिमा प्रसाद ने बुधवार को जस्टिस संजय किशन कौल की अध्यक्षता वाली पीठ को बताया, हम तीन महीने में एक स्पष्टीकरण ला रहे हैं कि अगस्त की नई नीति के तहत, 60 वर्ष की आयु मानदंड कोई मुद्दा नहीं होगा। हम इसे वापस लेने की प्रक्रिया में हैं। गरिमा प्रसाद ने यह भी बताया कि अपील लंबित होने के दौरान 20-25 वर्षों से जेलों में बंद उन कैदियों की समय पूर्व रिहाई पर पूर्व नीति (2018) के तहत विचार करने का निर्णय लिया है जिनके मामलों पर उस समय विचार नहीं किया गया था।
याचिकाकर्ता के वकील ऋषि मल्होत्रा ने कहा, राज्य के फैसले से उन सैकड़ों कैदियों को फायदा होगा, जिन्होंने 60 साल की पात्रता तय करने वाले नियम की सांविधानिक वैधता को चुनौती देते हुए याचिकाएं दायर की हैं। नए नियम के कारण यूपी की जेलों में अधिकतर उम्रकैद की सजा पाए दोषियों को समय पूर्व रिहाई के लिए आवेदन करने के अधिकार से वंचित कर दिया गया है।
पीठ ने न्याय मित्र की रिपोर्ट पर गौर करने पर पाया कि आजीवन कारावास की सजा काट रहे करीब 4,127 दोषी 14 वर्ष जेल में काट चुके हैं। पीठ ने इन दोषियों के आवेदनों को प्रोसेस करने के लिए चार महीने की बाहरी सीमा तय किया और उन पर फैसला करने के लिए छह महीने का समय दिया है।
पीठ ने कहा, हमारा विचार है कि राज्य को सबसे उचित कदम उठाना चाहिए। जब तक कुछ करने के लिए दबाव नहीं डाला जाता तब तक कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता। राज्य में चल रहे चुनावों को ध्यान में रखते हुए शीर्ष अदालत ने चुनाव की अवधि (10 मार्च तक) को बाहर कर दिया और इस तिथि से चार महीने बाद तक का समय दिया है।
सात में चार साल तक सजा काट चुके कैदियों के लिए भी बने नियम
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान देश के तमाम जेलों में कैदियों की भीड़ को देखते हुए कहा, वैसे कैदी, जिन्हें सात वर्ष तक की सजा मिली है और वे चार-पांच जेल में काट चुके हैं, उनकी समय पूर्व रिहाई को लेकर नीति बनाने की जरूरत है। कोर्ट ने न्याय मित्र को इस संबंध में हित धारकों से बातचीत करने के लिए कहा है।