उत्तर प्रदेश के ओबरा और दुद्धी विधानसभा सीटों पर चुनाव होने का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने इन दोनों विधानसभा सीटों पर होने वाले चुनाव पर रोक लगाने से इनकार किया है। सातवें चरण में इन सीटों पर चुनाव होना है। ये दोनों विधानसभा पहले अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों के लिए आरक्षित थीं लेकिन चुनाव आयोग ने इन दोनों ही सीटों को अनुसूचित जनजातियों के लिए आरक्षित करने का निर्णय लिया है।
आयोग के इस निर्णय को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति अभय मोहन सप्रे की अध्यक्षता वाली पीठ ने भारत के अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से सलाह के बाद सातवें चरण के लिए गुरुवार को चुनाव आयोग द्वारा जारी की जाने वाली अधिसूचना पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। हालांकि पीठ ने सवाल किया कि क्या चुनाव आयोग अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटों को अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर सकता है? पीठ ने कहा कि यह महत्वपूर्ण संवैधानिक मसला है।
सुनवाई के दौरान किसी अन्य मामले की पैरवी के लिए अदालत कक्ष में मौजूद अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से इस मसले पर सलाह मांगी। जिस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि चुनावी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लिहाजा मेरी राय है कि इस मामले में फिलहाल अदालत को दखल नहीं देना चाहिए। उन्होंने कहा कि अदालत को अंतरिम आदेश पारित नहीं करना चाहिए। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि अगर भविष्य में यह पाया जाता है कि इन दोनों सीटों पर चुनाव संवैधानिक प्रावधानों के आधार पर नहीं हुए हैं तो बाद में चुनाव को रद्द किया जा सकता है। यह विकल्प अदालत के पास मौजूद है।