दो फाड़ हुई समाजवादी पार्टी ने न सिर्फ खुद के लिए बल्कि विरोधी दलों के लिए भी परेशानी बढ़ा दी है। सपा विरोधी बसपा और भाजपा के नेता भी दबी जुबान स्वीकार कर रहे हैं कि अगर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के बागी तेवर बरकरार रहे तो उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का न सिर्फ सियासी समीकरण बदलेगा, बल्कि उन्हें कानून व्यवस्था और विकास की जगह नए मुद्दे भी तलाशने होंगे।
यही कारण है कि इन दोनों ही दलों की निगाहें फिलहाल सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के भावी रुख पर टिकी हैं। इन्हें अब भी लगता है कि सार्वजनिक तौर पर दो फाड़ हो चुकी सपा में चल रहे सियासी नाटक का पर्दा गिरना अभी बाकी है।
गौरतलब है कि सपा की प्रतिद्वंद्वी भाजपा और सपा ने फिलहाल राज्य की लचर कानून व्यवस्था और विकास को ही अपना प्रमुख मुद्दा बना रखा है। इन्हें डर है कि अगर अखिलेश ने शिवपाल यादव और उनके गुट से पल्ला झाड़ा तो कानून व्यवस्था का मुद्दा चुनाव प्रचार से किनारे हो जाएगा।