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रेल मंत्री ने भी माना, विमान और बस की बेहतरीन सर्विस रेलवे के लिए चुनौती

Mon, 02 Jan 2017 11:31 PM IST
नवनीत शरण/ नई दिल्ली
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रेलमंत्री सुरेश प्रभु
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यातायात के क्षेत्र में रेलवे का अधिकार अब खत्म होने लगा है। विमानन सेवा ही नहीं बस सेवा अब रेलवे के सामने बड़ी चुनौती है। इस बात को केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भी स्वीकारा है। यही वजह है कि रेलवे अपने यात्रा किराये के दर में कई तरह के बदलाव कर एक तरह से प्रयोग कर रहा है।
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केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने एक अनौपचारिक मुलाकात में कहा कि यातायात के क्षेत्र में रेलवे को पहले कोई चुनौती नहीं थी, लेकिन अब विमानन सेवा बड़ी चुनौती है। विमानन कंपनियों का ढाई हजार रुपये में विमान से एक जगह से दूसरे जगह यातायात कराने वाला फैसला चुनौतीपूर्ण है। इसी तरह बस ट्रांसपोर्ट सर्विस से भी रेलवे की प्रतिस्पर्द्धा बढ़ी है।
 
बता दें कि रेलवे इन दिनों अपने यात्रा किराया भाड़े में कई तरह के बदलाव कर रहा है। आय बढ़ाने के लिए कई तरह की छूट देकर भी लुभा रहा है। पहली बार रेलवे ने यह निर्णय लिया है कि बर्थ खाली रहने पर सभी तरह की ट्रेनों में 10 प्रतिशत यात्रा किराया में छूट दी जाएगी। इसी तरह फ्लैक्सी किराया दर में भी छूट दे रहा है। 
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शताब्दी जैसी ट्रेन में भी छूट दी जा रही है। सब अर्बन सिटी में आवागमन करने वाले बस की तरफ अपना रूख ना कर ले इसके लिए एमएसटी पास में भी छूट ऑफ ऑन लाइन पेमेंट करने के बहाने दे रहा है। इसी तरह मालभाड़े में भी रेलवे कई तरह के बदलाव प्रयोगात्मक तौर पर कर रहा है।




 

आधुनिक सुविधाओं से लैस तेजस भी हुई लेट

आधुनिक सुविधाओं से लैस तेजस भी हुई लेट

आधुनिक सुविधाओं से लैस तेजस ट्रेन के लिए अभी आपको इंतजार करना पड़ेगा। बजट में घोषित अब यह ट्रेन आगामी बजट के बाद ही चल सकेगी। पिछले दिनों रेलवे ने दावा किया था कि हर हाल में दूसरे बजट के पहले यानी जनवरी महीने में तेजस ट्रेन को ट्रैक पर उतार दिया जाएगा। 

केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने बताया कि यह ट्रेन अब मार्च में चलेगी। लिहाजा यह ट्रेन अपने समय से दो महीने लेट ही ट्रैक पर उतरेगी। बता दें कि तेजस ट्रेन के कोच को कपूरथला कोच फैक्ट्री में तैयार किया जा रहा है।

पिछले दिनों इस कोच का निर्माण तो किया गया, लेकिन रेलवे अधिकारियों के उम्मीदों पर खरा नहीं उतरने के कारण इस कोच को रिजेक्ट कर दिया गया और नया कोच बनाने का निर्देश दिया गया है। बने  हुए कोच को रेलवे ने सेमी हाई स्पीड ट्रेन में लगाने का निर्णय लिया है।
 
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रोलिंग स्टॉक (कोच) के कारण हो रही है ज्यादा मौत

रोलिंग स्टॉक (कोच) के कारण हो रही है ज्यादा मौत

केंद्रीय रेल मंत्री सुरेश प्रभु का मानना है कि रोलिंग स्टॉक (ट्रेन का कोच) में तकनीकी कमी के कारण ही हादसे होने पर लोगों की मौत हो रही है। पिछले दिनों पटना-इंदौर एक्सप्रेस के कानपुर के समीप हादसा होने पर बड़ी संख्या में यात्रियों की मौत हुई थी। एक  कोच दूसरे कोच के भीतर घुस जाने के कारण ज्यादा लोग हताहत होते है। इसे देखते हुए रेलवे ने परंपरागत कोच की जगह एलएचबी कोच बनाने का निर्णय लिया है।

उधर, लगातार हो रहे ट्रैक फ्रैक्चर के कारण ट्रेनों के पटरियों से उतरने  के मामले में वृद्धि को लेकर रेल मंत्री का कहना है कि अब इसकी निगरानी में भी बदलाव किया जाएगा। पहले ट्रैक मैन पटरियों का निरीक्षण करते थे लेकिन अब ऐसी मशीन उतारने की तैयारी में रेलवे है जो पटरियों का लगातार निरीक्षण करेगी। 

प्रभु ने बताया कि विदेशी कंपनी कोरिया व जापान से भी इस बाबत बातचीत की गई है। जल्द ही ट्रैक निगरानी के लिए इक्यूपमेंट खरीदा जाएगा। मैन्युअल चेकिंग ट्रैक की नहीं की जाएगी। प्रभु ने संरक्षा पर कहा कि इसके लिए पैसों की कोई कमी रेलवे के पास नहीं है। सिक्यूरिटी के लिए पैसा बाधा नहीं है। कोहरे के दौरान लेट हो रही ट्रेनों से पूछे गए सवाल में प्रभु ने कहा कि डिवाइस तैयार किया जा रहा है। त्रिनेत्र के सफल परीक्षण से इसमें कमी आएगी।
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