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उत्तर प्रदेश चुनाव: आखिर क्यों यहां के सियासी मैदान से नदारद हैं राहुल गांधी! लगाई जा रही हैं ऐसी अटकलें

सार

यूपी कांग्रेस से जुड़े कुछ नेता कहते हैं जब राजनैतिक माहौल बनाने के लिए बड़े-बड़े नेता मैदान में थे, तो चुनाव प्रचार के लिए भी उसी स्तर के बड़े नेताओं को मैदान में आना चाहिए। हालांकि कांग्रेस का कहना है पंजाब में चुनाव के बाद वह सभी बड़े नाम उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में दिखेंगे...
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जनसभा को संबोधित करते राहुल गांधी। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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कांग्रेस के स्टार प्रचारक राहुल गांधी अब तक उत्तर प्रदेश के चुनावों में नहीं दिखे हैं। सिर्फ राहुल गांधी ही नहीं, कांग्रेस के तमाम दिग्गज नेता भी उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनावों में इस बार नजर नहीं आ रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि राहुल के यूपी में कम प्रचार करने के पीछे कांग्रेस के अपने तर्क हैं।

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उत्तर प्रदेश में जैसे-जैसे चुनाव चरम पर होता गया, पार्टियां अपने स्टार प्रचारकों की लिस्ट भी सामने लाती गईं। हर चरण के मुताबिक कांग्रेस के स्टार प्रचारक तय किये गए, लेकिन पहले और दूसरे चरण में कांग्रेस ने जितने स्टार प्रचारकों की सूची दी थी उनमें से तकरीबन एक चौथाई स्टार प्रचारक खासकर बड़े नाम तो मैदान में दिखे ही नहीं। स्टार प्रचारकों की सूची में राहुल गांधी समेत कई पूर्व केंद्रीय मंत्री थे। लेकिन न तो राहुल गांधी की यूपी चुनाव में सक्रियता दिखी और न ही अन्य नेताओं की। कांग्रेस के बड़े नेता अपना नाम नहीं छापने की शर्त पर कहते हैं कि अगर स्टार प्रचारकों की सूची तैयार हुई है तो सभी स्टार प्रचारकों को उसी तरीके से मैदान में आना चाहिए जैसे दूसरी अन्य पार्टियों के नेता आते हैं। लेकिन कांग्रेस में यह सामंजस्य नहीं दिखता है। पार्टी के नेता दबी जुबान से इस बात को स्वीकार करते हैं जब आप खुद को लड़ाई में भाजपा और समाजवादी पार्टी के मुकाबले मानते हैं तो मैदान में भी आपको उसी रणनीति के तहत ही सामने आना होगा।

प्रियंका से ज्यादा सक्रिय थे राहुल

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव हों या लोकसभा चुनाव। प्रियंका गांधी से ज्यादा सक्रियता हमेशा राहुल गांधी की ही रही। राजनीतिक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं दरअसल राहुल गांधी न सिर्फ यहां से सांसद रहे बल्कि उनकी राजनैतिक रूप से सक्रियता भी शुरुआती दौर से उत्तर प्रदेश में रही। यही वजह है जब उत्तर प्रदेश में बड़े चुनाव होते हैं तो राहुल गांधी का चेहरा हमेशा मायने रखता है। अगर राहुल गांधी उत्तर प्रदेश में इस चुनाव में स्टार प्रचारक होने के बाद भी कम दिख रहे हैं तो तमाम तरह के सवाल उठने लाजमी भी हैं। हालांकि राहुल गांधी के उत्तर प्रदेश में न के बराबर आने को लेकर कांग्रेस का अपना तर्क है।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि जब प्रियंका गांधी की सक्रियता उत्तर प्रदेश में बनी हुई है और वह कार्यकर्ताओं से सीधे रूप से जुड़ रही हैं तो राहुल गांधी जैसे दूसरे बड़े नेताओं को अन्य प्रदेशों पर भी फोकस करना चाहिए और वह कर भी रहे हैं। एक नेता का कहना है कि प्रियंका गांधी पूरी तरह से उत्तर प्रदेश में सक्रिय हैं जबकि राहुल गांधी की सक्रियता गोवा, मणिपुर और पंजाब में रही है।

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बीते कुछ समय में अगर देखा जाए तो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कांग्रेस के तमाम बड़े नेताओं की सबसे ज्यादा सक्रियता लखीमपुर कांड के दौरान रही।

पंजाब के मुख्यमंत्री हों या छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री पंजाब के बड़े-बड़े नेताओं समेत कांग्रेस के कई कद्दावर नेताओं ने न सिर्फ उत्तर प्रदेश में डेरा डाला था बल्कि राजनीतिक माहौल बनाना भी शुरू किया था। यूपी कांग्रेस से जुड़े कुछ नेता कहते हैं जब राजनैतिक माहौल बनाने के लिए बड़े-बड़े नेता मैदान में थे, तो चुनाव प्रचार के लिए भी उसी स्तर के बड़े नेताओं को मैदान में आना चाहिए। हालांकि कांग्रेस का कहना है पंजाब में चुनाव के बाद वह सभी बड़े नाम उत्तर प्रदेश के चुनावी समर में दिखेंगे।

राजनीतिक गलियारों में बीते कुछ समय में प्रियंका गांधी और राहुल गांधी के बीच में सियासी उठापटक की भी बातें सामने आती रही हैं। भाजपा नेता खुलकर इसका प्रचार भी करते रहते हैं। हालांकि पंजाब में इस बारे में सवाल किए जाने पर प्रियंका गांधी ने इसे न सिर्फ बकवास बताया था, बल्कि यह भी कहा था कि वह अपने भाई के लिए अपनी जान दे सकती हैं और उनका भाई भी उनके लिए अपनी जान दे सकता है।

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