छोटे दलों को साथ लेने और विपक्ष के नाराज नेताओं को अपने खेमे में लाने की रणनीति पर काम करते हुए अमित शाह ने भाजपा के लिए कई अहम चुनाव जीते हैं। इसमें लोकसभा चुनावों से लेकर उत्तर प्रदेश और असम तक के राज्य भी शामिल हैं। लेकिन इस बार उनकी इसी रणनीति पर काम करते हुए अखिलेश यादव ने भाजपा खेमे के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। पश्चिम में आरएलडी नेता जयंत चौधरी को साथ लेकर वे ‘जाट लैंड’ पर पहले ही भाजपा की मुश्किलें बढ़ा चुके हैं। अब वे पश्चिमी यूपी के दूसरे दलों के नाराज नेताओं को अपने पाले में करने की कोशिश में लगे हैं। इससे आने वाले दिनों में पश्चिमी यूपी में सपा की स्थिति काफी मजबूत हो सकती है और भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
सपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार, भाजपा सहित कई अन्य दलों के नेता भी पार्टी के संपर्क में हैं। आने वाले दिनों में कई बड़े नेता समाजवादी पार्टी का दामन थाम सकते हैं। इसमें मुस्लिम समुदाय के साथ-साथ समाज के विभिन्न वर्गों के नेता शामिल हो सकते हैं। सपा नेता के मुताबिक, सपा का जोर पश्चिमी यूपी में गैर-भाजपाई वोटरों को एकजुट रखने पर है। इसके लिए विभिन्न स्थानीय नेताओं से बातचीत की जा रही है।
यूपी विधानसभा चुनाव के पहले चरण में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 11 जिलों की 58 विधानसभा सीटों पर वोट डाले जाएंगे। भाजपा नेता अमित शाह को इस मोर्चे पर लगाया गया है। उनके ऊपर जाटों की नाराजगी कम करते हुए पश्चिमी उत्तर प्रदेश में पार्टी की पैठ मजबूत बनाने की जिम्मेदारी है। अमित शाह ने पश्चिमी यूपी के नाराज जाटों को दोबारा पार्टी से जोड़ने के लिए हरियाणा और राजस्थान के जाट नेताओं को महत्त्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। वे अपनी रोटी-बेटी के पारंपरिक संबंधों के आधार पर जाटों और खाप नेताओं को पार्टी के पक्ष में जोड़ने की कोशिश में जुटे हैं।
जाट युवाओं के लिए सेना में नौकरी आकर्षण का बड़ा केंद्र रही है। बड़ी संख्या में यहां के युवा सेना में विभिन्न पदों पर काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार ने सैनिकों का मानदेय बढ़ाकर और वर्षों से अटकी ओआरओपी योजना का लाभ देकर सैनिकों का मनोबल बढ़ाया है। इसका लाभ यहां के अनेक सैनिक परिवारों को मिल रहा है। भाजपा जाट नेताओं के साथ अपनी मुलाकातों में इन मुद्दों को प्रमुखता से उठा रही है।