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UP Congress President: सिर्फ दलित चेहरा लाने से बदल जाएगी यूपी कांग्रेस! पार्टी के भीतर उठने लगे विरोध के स्वर

सार

UP Congress President: कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि बृजलाल खाबरी को अभी प्रदेश अध्यक्ष बने हुए वक्त भी नहीं बीता कि कांग्रेस में विरोध के स्वर उठने लगे। विरोध इसी बात का होने लगा है कि आखिर दूसरी पार्टी से आने वाले नेता को पुराने कार्यकर्ताओं और जमीन से जुड़े नेताओं के ऊपर कैसे थोप दिया गया है...
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Congress appoints Brijlal Khabri as UP Congress President - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश में दलित चेहरे के साथ नए प्रदेश अध्यक्ष की ताजपोशी तो कर दी गई है। लेकिन बड़ा सवाल यही है क्या उत्तर प्रदेश कांग्रेस की तस्वीर बृजलाल खाबरी बदल पाएंगे। फिलहाल खाबरी की ताजपोशी के साथ ही पार्टी के भीतर ही विरोध के सुर उठने लगे हैं। पुराने कार्यकर्ता और नेताओं को शिकायत इस बात की है कि आखिर उनके ऊपर दूसरी पार्टी से लाए गए नेताओं को ही क्यों थोपा जा रहा है। नेताओं का कहना है कि खाबरी को लाने से जातिगत समीकरण भले ही सध जाएं, जमीनी स्तर पर अभी भी पार्टी बेहद बेहद कमजोर है।

व्हाट्सएप ग्रुप पर विरोध

बृजलाल खाबरी को अभी प्रदेश अध्यक्ष बने हुए वक्त भी नहीं बीता कि कांग्रेस में विरोध के स्वर उठने लगे। कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि पार्टी के भीतर निश्चित तौर पर बृजलाल खाबरी को बहुत चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। वह बताते हैं कि पार्टी के अंदर सबसे प्रमुख विरोध इसी बात का होने लगा है कि आखिर दूसरी पार्टी से आने वाले नेता को पुराने कार्यकर्ताओं और जमीन से जुड़े नेताओं के ऊपर कैसे थोप दिया गया है। इस बात की चर्चा कार्यकर्ताओं और नेताओं ने अपने एक व्हाट्सएप ग्रुप पर भी की है।

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सूत्रों का कहना है व्हाट्सएप ग्रुप पर इस तरीके की चर्चा होने के बाद कुछ वरिष्ठ नेताओं ने इस पर आपत्ति दर्ज की, तो उसे डिलीट भी कर दिया गया। लेकिन इस बात का अंदाजा हो गया कि खाबरी को पार्टी के भीतर ही भारी विरोध का सामना करना पड़ सकता है।
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दरअसल विरोध की बड़ी वजह में एक प्रमुख वजह यह है कि पार्टी के कई कद्दावर नेताओं को दरकिनार करते हुए खाबरी को प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया है। नए प्रदेश अध्यक्ष के बनने से पहले पार्टी में पहले ही उत्तर प्रदेश के कई नेताओं के नाम की चर्चा हो रही थी। इनमे से कुछ नाम प्रदेश अध्यक्ष की रेस में बने हुए थे। अब विरोध उन नेताओं के समर्थकों और पार्टी के कुछ चुनिंदा कार्यकर्ताओं की ओर से किया जाने लगा है। पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि उनके पास इस संबंध में सूचनाएं जरूर आई हैं लेकिन यह विरोध का मसला है ही नहीं। हालांकि पार्टी से ही जुड़े एक वरिष्ठ नेता का कहना है कि ऐसा नहीं है उत्तर प्रदेश कांग्रेस में जुझारू नेता और पार्टी के कार्यकर्ताओं को साथ लेकर चलने वाले लोगों में कमी है, बावजूद इसके दूसरी पार्टी में लंबे समय तक काम करने वाले नेता को जब कांग्रेस के पुराने कार्यकर्ताओं के ऊपर थोपा जाएगा तो निश्चित तौर पर विरोध होगा ही।

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बसपा के कोर वोटबैंक पर सेंध

दरअसल उत्तर प्रदेश में कांग्रेस अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रही है। राजनीतक विश्लेषक जीडी शुक्ला कहते हैं कि कांग्रेस ने जातिगत समीकरणों के आधार पर बहुत लंबे समय बाद अपने प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव किया है। शुक्ला कहते हैं कि संभव है पार्टी में विरोध हो रहा हो, लेकिन इसका पार्टी आलाकमान के लिए गए फैसले पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। उनका कहना है कि कांग्रेस में इस वक्त जितने भी नेता हैं, अगर पार्टी आलाकमान ने उन सब को दरकिनार करते हुए खाबरी पर दांव लगाया है, तो निश्चित तौर पर सोच समझकर और उत्तर प्रदेश की जातिगत समीकरणों के आधार पर ही लगाया होगा।

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पार्टी से जुड़े वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पार्टी ने बृजलाल को प्रदेश अध्यक्ष बनाकर अपने खोए हुए वोट बैंक को वापस पाने की मुहिम में एक कदम आगे बढ़ाया है। केंद्रीय नेतृत्व से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि बहुजन समाज पार्टी का जो कोर वोट बैंक है दरअसल वह कांग्रेस का ही असली वोट बैंक है, जो इस वक्त नेतृत्व विहीन होने के चलते भाजपा की ओर शिफ्ट हो गया है। पार्टी का कहना है कि खाबरी के माध्यम से उनका अपना कोर वोट बैंक ना सिर्फ उनके साथ जुड़ेगा, बल्कि उसकी लड़ाई भी कांग्रेस लगातार लड़ती आई है और आगे भी लड़ती रहेगी।

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ग्राउंड लेवल पर मजबूत होना जरूरी

कांग्रेस पार्टी से जुड़े एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अभी भी पार्टी को ग्रामीण स्तर पर ब्लॉक स्तर पर और छोटे-छोटे कस्बों के स्तर पर बहुत काम करने की आवश्यकता है। उक्त कांग्रेस नेता का कहना है कि जिस तरीके से कोविड के दौरान पार्टी ने अपना एक नेटवर्क मजबूत किया था, उसी के माध्यम से ही अब पार्टी को गांव-गांव में मजबूत करने का वक्त है। लेकिन हैरानी की बात है कि प्रदेश कांग्रेस अभी भी उसी स्तर पर संगठन को मजबूत नहीं कर पा रही है जिस स्तर से करने की आवश्यकता है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का कहना है कि नेतृत्व बदलने से संभव है कि जातिगत समीकरण साध लिए जाएं, लेकिन जब तक आप ग्राउंड लेवल पर मजबूत नहीं होंगे तब तक सिर्फ जातिगत आधार पर भेजे गए प्रदेश अध्यक्ष के माध्यम से वोट नहीं जोड़ पाएंगे। इसलिए अभी भी पार्टी नेतृत्व को और केंद्र में बैठे कांग्रेस पार्टी के नेताओं को इस बात की ओर ध्यान देना होगा कि ग्रामीण स्तर पर, कस्बे स्तर पर और छोटे-छोटे शहरों के लेवल पर पार्टी कितना मजबूती से काम कर रही है। वे कहते हैं कि प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से पहले भी इस बात को लेकर लगातार मांग उठती रही है कि निचले स्तर पर पार्टी को बगैर मजबूत किए आप कुछ भी नतीजा नहीं पा सकते हैं।

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