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UP: ब्राह्मण मतदाताओं को साधने की कोशिश या यूजीसी पर नाराजगी कम करने का प्रयास? बटुकों के सम्मान से उठे सवाल

सार

भाजपा जानती है कि ब्राह्मण, राजपूत, बनिया और लाला उसका सबसे प्रबल समर्थक वर्ग रहा है। वह केवल उसे वोट ही नहीं देता, बल्कि हर मंच पर उसके लिए वैचारिक लड़ाई लड़ने का काम भी करता है। यदि इस वर्ग का समर्थन उससे दूर हो जाता है तो यूपी के साथ-साथ पूरे देश की राजनीति में टिकना उसके लिए मुश्किल हो जाएगा। 
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यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी में ब्राह्मणों पर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने गुरुवार को अपने आवास पर ब्राह्मण बटुकों का सम्मान किया जिसके बाद इस बात की चर्चा शुरू हो गई कि भाजपा अपने इस कोर वोट बैंक को लुभाने के लिए सक्रिय हो गई है। पहले प्रयागराज में शंकराचार्य विवाद और बाद में यूजीसी को लेकर कहा जा रहा है कि प्रदेश का ब्राह्मण वर्ग भाजपा से नाराज है और आगामी चुनाव में वह गैर भाजपाई विकल्प तलाशने की कोशिश कर सकता है। इस कथित नाराजगी को भुनाने के लिए बसपा-सपा दोनों ही दल सक्रिय हो गए हैं जो इसी वर्ग के समर्थन के सहारे 2007 और 2012 में अपनी सरकार बना चुके हैं। इस राजनीतिक रस्साकसी के बाद यूपी में लगभग 11 फीसदी जनसंख्या वाला ब्राह्मण वर्ग किधर जा सकता है? 
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दरअसल, प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर वर्ग के नेता बनकर उभरे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण यही रहा है कि उन्होंने प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त कर रखी है जिससे समाज का हर वर्ग स्वयं को सुरक्षित महसूस कर रहा है। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भी ब्राह्मणों के भाजपा से नाराज होने की बातें कही गई थी, लेकिन अंततः योगी आदित्यनाथ एक बार फिर इस वर्ग की पसंद बनकर उभरे और योगी आदित्यनाथ लगातार दूसरी बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने में सफल रहे।   

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यूजीसी से मामला बिगड़ा
लेकिन कहा जा रहा है कि इस बार मामला इतना सीधा-साधा नहीं है। भाजपा की केंद्र सरकार के द्वारा विश्वविद्यालयों में यूजीसी कानून लाने की कोशिश करने के बाद पार्टी का कोर वोटर वर्ग ब्राह्मण-ठाकुर-बनिया और लाला समुदाय उससे नाराज है। उसे लग रहा है कि अब कॉलेजों में भी भेदभाव के नाम पर उनके बच्चों को निशाना बनाया जा सकता है। इस आशंका से डरे सामान्य वर्ग में सोशल मीडिया से लेकर विभिन्न कार्यक्रमों और विरोध प्रदर्शनों में सामान्य वर्ग की यह नाराजगी खुलकर सामने आ रही है। 

भाजपा जानती है कि ब्राह्मण, राजपूत, बनिया और लाला उसका सबसे प्रबल समर्थक वर्ग रहा है। वह केवल उसे वोट ही नहीं देता, बल्कि हर मंच पर उसके लिए वैचारिक लड़ाई लड़ने का काम भी करता है। यदि इस वर्ग का समर्थन उससे दूर हो जाता है तो यूपी के साथ-साथ पूरे देश की राजनीति में टिकना उसके लिए मुश्किल हो जाएगा। 

ब्राह्मणों के दूर होने से खात्मे के कगार पर पहुंची कांग्रेस 
ब्राह्मण वर्ग कभी कांग्रेस का कोर वोट बैंक हुआ करता था। ब्राह्मण, दलित और मुसलमानों के सहयोग से ही कांग्रेस लंबे समय तक सत्ता में बनी रही। लेकिन कांग्रेस की गलत नीतियों और भाजपा के राम मंदिर आंदोलन से आकर्षित होकर ब्राह्मण वर्ग कांग्रेस से छिटक कर भाजपा के पास चला गया। कांग्रेस इस नुकसान से आज तक उबर नहीं पाई और वह पहले सत्ता में आने के लिए दूसरे दलों पर निर्भर हुई और अंततः सत्ता से बाहर हो गई। राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि यदि भाजपा अपने इस कोर वोट बैंक को साधने में गलती करती है तो उसे इसका बड़ा खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। 

2024 के लोकसभा चुनाव में दलित मतदाताओं के एक छोटे वर्ग के दूर जाने का नुकसान उठा चुकी भाजपा भी इस सच को जानती है। माना जा रहा है कि यही कारण है कि पार्टी अपने इस कोर वोट बैंक को संभालने के लिए नई रणनीति के साथ मैदान में डट गई है।

संघ प्रमुख मोहन भागवत ने 18 फरवरी को यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मुलाकात की है। 19 फरवरी को मोहन भागवत ने प्रदेश के उपमुख्यमंत्रियों ब्रजेश पाठक और केशव प्रसाद मौर्य से अलग-अलग मुलाकात की है। इस मुलाकात को भी यूपी की बदली सियासत से जोड़कर देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि संघ इस पूरे घटनाक्रम को संभालने में जुट गया है।



सबका साथ, सबका विश्वास के साथ चलते हैं- भाजपा
उत्तर प्रदेश भाजपा प्रवक्ता पल्लवी सिंह ने अमर उजाला से कहा कि उनकी पार्टी देश के हर समाज, हर वर्ग को साथ लेकर चलने का प्रयास करती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समाज के हर वर्ग के साथ, सबके विश्वास और सबके विकास की बात करते हैं। यही कारण है कि समाज के हर वर्ग का भाजपा को समर्थन मिलता है और भाजपा की सरकारें हर राज्य में लगातार प्रो इनकमबेंसी फैक्टर के सहारे सत्ता में आ रही हैं। 

पल्लवी सिंह ने कहा कि कुछ घटनाओं को लेकर सपा और कांग्रेस के नेता समझने लगते हैं कि अब यह वर्ग उनके पास आ जाएगा। लेकिन जनता ने अपने अनुभव से यह देखा है कि इन दलों की सरकारों में किस तरह एक खास वर्ग का तुष्टिकरण किया जाता था। गरीबों-महिलाओं की बजाय अपराधियों का संरक्षण किया जाता था। उन्होंने कहा कि इसी कारण प्रदेश की जनता लगातार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ में अपना भरोसा बनाए हुए है। उन्होंने दावा किया कि भाजपा 2027 का विधानसभा चुनाव भी पूर्ण बहुमत से जीतेगी और जनता के भरोसे पर खरी उतरेगी। 

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योगी सरकार की कलई खुली- कांग्रेस
उत्तर प्रदेश कांग्रेस उपाध्यक्ष विश्व विजय सिंह ने कहा कि विकास का दावा करने वाली भाजपा सरकारों की कलई खुल गई है। भाजपा नेता दावा तो विकास का करते हैं, लेकिन प्रदेश की जनता ने देख लिया है कि किस तरह वे पहले एक वर्ग विशेष से दूसरे वर्ग को भड़का कर सांप्रदायिक आधार पर अपनी राजनीति करते हैं। अब वे हिंदू समाज के अलग-अलग वर्गों को भी तोड़ने में जुट गए हैं। 
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विश्व विजय सिंह ने कहा कि आज ब्राह्मण बटुकों का सम्मान करने वाली भाजपा उस समय कहां थी जब प्रयागराज में इनका अपमान किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि ब्राह्मण-राजपूत वर्गों की तरह समाज के दूसरे वर्ग भी भाजपा से नाराज हैं। समय आने पर जनता अपनी यह नाराजगी दिखाएगी और प्रदेश में कांग्रेस के समर्थन वाली सरकार बनाएगी।  

टूट चुका भाजपा का तिलस्म- सपा
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता मोहम्मद आजम खान ने अमर उजाला से कहा कि भाजपा एक झूठा स्वप्न दिखाकर सत्ता में आई थी और एक-एक कर हर वर्ग उनकी सच्चाई समझते हुए उससे दूर जा रहा है। उन्होंने कहा कि इसके पहले दलित वर्ग को यह एहसास हो गया था कि भाजपा संविधान में बदलाव कर सकती है, इसके बाद वह वर्ग भाजपा सै दूर चला गया। सपा नेता ने कहा कि अब ब्राह्मण वर्ग यह देख रहा है कि किस तरह उसके साथ अन्याय किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि जिस तरह प्रयागराज में ब्राह्मण बटुकों का अपमान किया गया था, उससे साफ हो गया कि भाजपा किसी की हितैषी नहीं है। 

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