हिंदी पट्टी में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) की हाई स्कूल परीक्षाओं के शनिवार को घोषित हुए परिणामों से पता चला है कि अंग्रेजी और गणित की तुलना में हिंदी में ज्यादा छात्र फेल हुए।
यूपी बोर्ड हाईस्कूल के हिंदी की परीक्षा में 5.74 लाख से ज्यादा छात्र फेल हुए, जबकि अंग्रेजी में 5.02 लाख फेल हुए और गणित विषय में नाकाम रहने वाले छात्रों की संख्या 5.03 लाख है।
इस साल, कुल 29.50 लाख छात्रों ने हिंदी का पेपर दिया और इनमें से केवल 23.76 लाख छात्र ही इस विषय में पास हो पाए, जो ज्यादातर छात्रों की मातृभाषा है। हिंदी के पेपर के लिए पास प्रतिशत सिर्फ 80.54 फीसदी था।
बोर्ड सचिव नीना श्रीवास्तव ने कहा, “हिंदी में इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के फेल होने का कोई विशेष कारण नहीं हो सकता है। हो सकता है कि उन्होंने इस विषय की पढ़ाई उतनी गंभीरता से नहीं की होगी जितना उन्होंने अन्य विषयों को पढ़ा होगा।”
काकोरी में बाबू त्रिलोकी सिंह इंटर कॉलेज के प्रिंसिपल आरके सिंह का कहना है, "छात्र हिंदी विषय को हल्के में लेते हैं। वे मानने लगते हैं कि यह उनकी मातृभाषा है और वे इस विषय में पारंगत हैं। लेकिन, ऐसा नहीं है। हिंदी भी छात्रों से एक विषय के रूप में ज्यादा समय की मांग करती है।"
अंग्रेजी में, 23.95 लाख छात्र परीक्षा में उपस्थित हुए और इनमें से 18.93 लाख परीक्षार्थियों ने परीक्षा पास कर ली और 5.02 लाख छात्र अंग्रेजों की भाषा में फेल हो गए। 79.09% छात्रों ने विषय पास किया।
गणित में 19.12 लाख छात्रों ने परीक्षा दी जबकि 14.09 लाख ने सफलतापूर्वक पेपर पास किया और 5.03 लाख छात्र गणित के पेपर में फेल हुए।