यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले दिन ही प्रदेश भर में 1,62,445 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा छोड़ दी। इनमें हाईस्कूल के 1,29,091 और इंटरमीडिएट के 33,354 परीक्षार्थी शामिल हैं। पूरे प्रदेश में हाईस्कूल में कुल 103 और इंटरमीडिएट में मात्र सात नकलची पकड़े गए। हालांकि हिंदी के पर्चे में जमकर नकल हुई। कई केंद्रों पर छात्रों को पर्चा बोलकर हल कराया गया।
बोर्ड परीक्षा के पहले दिन हाईस्कूल में हिंदी और इंटरमीडिएट में भी हिंदी एवं सामान्य हिंदी की अनिवार्य प्रश्नपत्र की परीक्षा में 1.62 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं ने परीक्षा नहीं दी। यूपी बोर्ड के अधिकारियों का कहना है कि यह नकलचियों पर बरती गई सख्ती का परिणाम है। इस बार अनुपस्थित परीक्षार्थियों की जानकारी देने के लिए ऑनलाइन व्यवस्था लागू की गई थी। ऑनलाइन आंकड़े मिल जाने के कारण पूरे प्रदेश में अनुपस्थित छात्रों की गणना आसान हो गई।
बोर्ड सचिव शैल यादव ने बताया कि गोण्डा में सबसे अधिक 8270 और जौनपुर में 5546 छात्र-छात्राओं ने परीक्षा ने नहीं दी है। बताया कि दसवीं एवं बारहवीं के आवेदन के समय बोगस परीक्षार्थियों ने फार्म ही नहीं भरा था। इसी कारण से 2017 की परीक्षा में पहले दिन परीक्षा छोड़ने वालों की संख्या में कमी आई है। 2016 में पहले दिन परीक्षा छोड़ने वालों की संख्या सात लाख थी।
भारी अव्यवस्था के बीच शुरू हुई बोर्ड परीक्षा
यूपी बोर्ड परीक्षा के पहले दिन ही हिन्दी के पर्चे में जमकर नकल हुई और अव्यवस्थाओं का बोलबाला रहा। कई केंद्रों पर छात्रों को पर्चा बोलकर हल कराया जाता रहा। पहली पाली में हाईस्कूल हिन्दी, इंटरमीडिएट में सैन्य विज्ञान, दूसरी पाली में इंटरमीडिएट हिन्दी का पर्चा था। पर्चा आसान होने के बाद भी नकल हुई। हाईस्कूल में हिन्दी काफी अहम है। हिन्दी में फेल छात्रों को अन्य सभी विषयों में पास होने के बाद भी फेल माना जाता है, जबकि किसी अन्य एक विषय में फेल होने पर पास होने की सुविधा मिलती है।