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Bangladesh: अदालतों में हो रही घटनाओं को लेकर परेशान बांग्लादेश के मुख्य न्यायाधीश, कहा- बारीकी से रख रहे नजर

Thu, 28 Nov 2024 02:22 PM IST
काव्या मिश्रा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका

सार

प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि इस तरह की घटनाएं फिर से न हो यह सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के भीतर ही जिला न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों में व्यापक उपाय लागू किए हैं।
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मुख्य न्यायाधीश डॉ. सैयद रिफत अहमद - फोटो : supremecourt.gov
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विस्तार
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बांग्लादेश में हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं। जहां हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, वहीं कुछ अदालतों से जुड़े लोगों पर भी हमला किया गया है। ऐसे में अब यहां के मुख्य न्यायाधीश डॉ. सैयद रिफत अहमद ने हाल ही में शीर्ष और निचली अदालतों में हुईं अप्रिय घटनाओं को लेकर चिंता जताई। 

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'न्यायिक परिसरों में हुई घटनाओं को लेकर चिंतित'
उन्होंने गुरुवार को कहा कि वकीलों के एक समूह ने खुली अदालत में सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश पर हमला करने की कोशिश की और पिछले दो दिनों में एक अन्य वकील की हत्या कर दी गई। हम शीर्ष अदालत में हाल ही में हुई घटनाओं और देशभर में न्यायिक परिसरों के भीतर हुई घटनाओं को लेकर बेहद चिंतित हैं।

उन्होंने आगे कहा, 'सभी घटनाक्रमों की बारीकी से निगरानी की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि चुनौतियों के बावजूद न्यायिक प्रक्रियाओं में कोई बाधा न आए।'
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फिर से घटनाएं न हो इसके लिए लागू किए कई उपाय: प्रधान न्यायाधीश
प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उनके कार्यालय ने इस तरह की घटनाएं फिर से न हो यह सुनिश्चित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के भीतर ही जिला न्यायाधीशों और मजिस्ट्रेटों में व्यापक उपाय लागू किए हैं और सभी अदालतों एवं न्यायाधिकरणों से अपना कामकाज सामान्य रूप से जारी रखने को कहा।

'सुप्रीम कोर्ट लगातार सतर्क बना हुआ है' 
उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में अदालतों में कई समस्याएं पैदा हुई हैं। सुप्रीम कोर्ट सतर्क है ताकि लोग बिना किसी बाधा के अदालतों का लाभ उठा पाएं। प्रधान न्यायाधीश ने सभी अदालतों और न्यायाधिकरणों को अपना कामकाज सामान्य रूप से जारी रखने के स्पष्ट निर्देश जारी किए और देश के हित में न्यायपालिका की अहम भूमिका पर जोर दिया। 

न्यायमूर्ति कमाल पर फेंके गए थे अंडे
गौरतलब है, वकीलों के एक समूह ने बुधवार को अदालत कक्ष में धावा बोल दिया और न्यायमूर्ति मोहम्मद अशरफुल कमाल पर अंडे फेंके, जब सुनवाई चल रही थी, जिससे उन्हें अचानक सुनवाई समाप्त करने और एक साथी न्यायाधीश के साथ जाने के लिए मजबूर होना पड़ा। वकीलों ने आरोप लगाया कि कमाल ने 2016 में एक फैसले में दिवंगत राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बारे में नकारात्मक टिप्पणी की थी। एक प्रदर्शनकारी का कहना था कि हमने आपको कई वर्षों तक सहन किया है।

प्रदर्शन कर रहे वकील ने कहा, 'एक न्यायाधीश के रूप में आपको कार्यवाही करने का कोई अधिकार नहीं है यदि आप अभी भी इस तरह के पक्षपातपूर्ण विचार रखते हैं।' वहीं दूसरे वकील ने उन पर अंडा फेंका। 

छात्रों के खिलाफ जाने का लगाया इन पर आरोप
वहीं एक अन्य घटना में, वकीलों के एक अन्य समूह ने हाईकोर्ट डिवीजन के रजिस्ट्रार मुंशी मोशियार रहमान को कुछ समय के लिए कार्यालय में बंद कर दिया था और कार्यालय से उनकी नेमप्लेट को यह कहते हुए हटा दिया था कि वह पांच अगस्त को छात्रों के नेतृत्व वाली लहर में अपदस्थ फासीवादी सरकार के सहयोगी थे।

चिन्मय दास की गिरफ्तारी के बाद से बवाल
गौरतलब है कि 26 नवंबर को हिंदू आध्यात्मिक नेता चिन्मय कृष्ण दास ब्रह्मचारी की जमानत याचिका खारिज होने के बाद उनके समर्थकों ने जेल ले जा रहे जेल वैन को रोक दिया था। इस घटना के दौरान एक सरकारी वकील की मौत हो गई थी। दास को देशद्रोह के एक मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में एक अदालत ने उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया था, जिससे राजधानी ढाका और बंदरगाह शहर चटगांव सहित विभिन्न स्थानों पर समुदाय के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया था।

अन्य घटनाक्रमों में बांग्लादेश के प्रमुख शहरों में अदालत परिसर में अफरातफरी नजर आई, जबकि अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग पार्टी के कई नेताओं और करीबी सहयोगियों पर पुलिस सुरक्षा के बावजूद अदालत में पेशी के दौरान भीड़ ने हमला किया।

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