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370 पर अमेरिका, चीन के बाद रूस की दो टूक, भारत का फैसला संवैधानिक दायरे में

Sat, 10 Aug 2019 10:55 AM IST
Sneha Baluni न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • अनुच्छेद 370:  यूएन, अमेरिका और चीन के बाद अब रूस ने भी भारत के फैसले का किया समर्थन।
  • रूस ने कहा- जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित प्रदेश बनाने का फैसला भारत के संविधान के दायरे में।
  • अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र ने कश्मीर मसले को द्विपक्षीय तरीके से सुलझाने को कहा।
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व्लादिमिर पुतिन-डोनाल्ड ट्रंप-शी जिनपिंग - फोटो : इंस्टाग्राम
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विस्तार
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पाकिस्तान कश्मीर मसले को हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने के लिए एड़ी चोटी की कोशिश कर रहा है मगर उसे उम्मीद की कोई किरण दिखाई नहीं दे रही है। शुक्रवार को पाकिस्तान की कोशिशों को उस समय झटका लगा जब संयुक्त राष्ट्र, अमेरिका और चीन ने उसका साथ देने से मना कर दिया। दरअसल, पाकिस्तान भारत सरकार के अनुच्छेद 370 को हटाने और जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांटकर केंद्र शासित प्रदेश बनाने के फैसले के खिलाफ अतंरराष्ट्रीय हस्तक्षेप या मध्यस्थता चाहता है।

रूस ने कहा- भारत ने 370 पर संवैधानिक फैसला लिया

वहीं शनिवार को अनुच्छेद 370 पर भारत सरकार के फैसले का रूस ने भी समर्थन किया है। रूस के विदेश मंत्रालय का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में जो भी परिवर्तन किए गए हैं वह भारतीय गणराज्य के संविधान के ढांचे के तहत किया गया है।

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रूस के विदेशा मंत्रालय ने कहा है, हम भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों के सामान्यीकरण का समर्थक है। हमें उम्मीद है कि उनके बीच के मतभेदों को द्विपक्षीय आधार पर राजनीतिक और राजनयिक तरीकों से हल किया जाएगा। हमें उम्मीद है कि भारत और पाकिस्तान, भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर में किए गए बदलाव के बाद किसी तरह के तनाव को बढ़ावा नहीं देंगे।

पाकिस्तान ने यूएन से लगाई गुहार

इससे पहले छह अगस्त को पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) को पत्र लिखा था। मगर यूएन ने उसकी अपील को खारिज कर दिया। पाकिस्तान को सबसे बड़ा झटका चीन ने दिया जो उसका हर परिस्थिति में साथ देने वाला सहयोगी माना जाता है। भारत के कुछ कूटनीतिक कदमों ने इस बात को सुनिश्चित किया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (यूएनएससी) पाकिस्तान के उस पत्र का संज्ञान न ले जिसमें उसने जम्मू कश्मीर के मसले पर हस्तक्षेप करने की मांग की थी। 



छह अगस्त को यूएनएससी और यूएन महासभा की अध्यक्ष को लिखे पत्र में पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने हस्तक्षेप की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि जम्मू-कश्मीर को लेकर भारत ने संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों का उल्लंघन किया है इसलिए इसमें हस्तक्षेप किया जाना चाहिए। पाकिस्तान ने दलील दी थी कि भारत ने जम्मू-कश्मीर को अनौपचारिक तरीके से विलय किया है और यह यूएनएससी के प्रस्ताव 48 का उल्लंघन है। 

अमेरिका और चीन ने भी लगाई लताड़

यूएनएससी ने पाकिस्तान के अनुरोध को खारिज करते हुए उसे शिमला समझौता की याद दिलाई। जिसके तहत कश्मीर मसला भारत और पाकिस्तान का द्विपक्षीय मसला है और इसमें तीसरा पक्ष हस्तक्षेप नहीं कर सकता है। पाकिस्तान को अमेरिका से भी राहत नहीं मिली। यहां विदेश विभाग के प्रवक्ता मे कहा कि कश्मीर पर अमेरिकी नीति में कोई बदलाव नहीं है जो प्रत्यक्ष तौर पर द्विपक्षीय वार्ता के लिए कहता है। अंत में चीन ने पाकिस्तान का समर्थन करने से मना कर दिया और कहा कि वह भारत और पाकिस्तान को मैत्रीपूर्ण पड़ोसी मानता है और चाहता है कि वह कश्मीर मसले को यूएन के प्रस्ताव और शिमला समझौते के तहत सुलझाए।

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