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West Bengal: 'बंगाल में SIR से 1.2 करोड़ 'अवैध मतदाता' हट सकते हैं', केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर का बड़ा दावा

Thu, 09 Oct 2025 07:58 PM IST
लव. गौर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता

सार

West Bengal SIR: केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद शांतनु ठाकुर ने बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से लगभग 1.2 करोड़ अवैध मतदाता हटाए जा सकते हैं।
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शांतनु ठाकुर - फोटो : फेसबुक/शांतनु ठाकुर
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पश्चिम बंगाल में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी चुनाव आयोग पर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर हमलावर हैं। ममता बनर्जी ने एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग पर राज्य के अधिकारियों को धमकाने का आरोप लगाया है। इस बीच केंद्रीय मंत्री और भाजपा सांसद शांतनु ठाकुर ने गुरुवार को बड़ा दावा करते हुए कहा है कि बंगाल में एसआईआर से 1.2 करोड़ 'अवैध मतदाता' हट सकते हैं।
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1.2 करोड़ फर्जी वोटर हटेंगे- शांतनु ठाकुर 
केंद्रीय मंत्री शांतनु ठाकुर ने दावा किया है कि चुनाव आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के जरिए पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से लगभग 1.2 करोड़ "अवैध मतदाता" हटाए जा सकते हैं। इस पर तृणमूल कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए चेतावनी दी कि इस कदम से सबसे ज्यादा नुकसान मतुआ शरणार्थियों को होगा।

दरअसल, उत्तर 24 परगना जिले के गायघाटा में विजया सम्मिलनी कार्यक्रम में बोलते हुए मतुआ समुदाय के प्रमुख नेता शांतनु ठाकुर ने कहा कि एसआईआर एक पारदर्शी मतदाता सूची सुनिश्चित करेगा और राज्य की मतदाता सूची से "रोहिंग्या, घुसपैठिए और फर्जी मतदाता" कहे जाने वाले लोगों को हटा देगा।
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उन्होंने कहा, "अगर एसआईआर को सही तरीके से लागू किया गया, तो टीएमसी सरकार के पास बचने का कोई रास्ता नहीं बचेगा। पश्चिम बंगाल में अवैध रूप से मतदाता बने कम से कम एक करोड़ से 1.2 करोड़ लोगों के नाम हटा दिए जाएंगे। रोहिंग्या, घुसपैठिए और फर्जी मतदाता अब वोट नहीं डाल पाएंगे।"

शांतनु ठाकुर ने जोर देकर कहा कि एक साफ मतदाता सूची पश्चिम बंगाल में वास्तविक बदलाव का मार्ग प्रशस्त करेगी। उन्होंने कहा, "जो लोग सचमुच बदलाव चाहते हैं, जो पश्चिम बंगाल में उद्योग, शिक्षा और बेहतर स्वास्थ्य सेवा चाहते हैं, वे वोट दे पाएंगे। उनके वोटों से भाजपा जीतेगी और सरकार बनाएगी।"

कार्यक्रम के बाद में पत्रकारों से बात करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस संशोधन से पारदर्शिता आएगी और मतदाता सूची में अवैध मतदाताओं का पर्दाफाश होगा। उन्होंने कहा, "एक पारदर्शी मतदाता सूची सामने आएगी। हम देखेंगे कि कितने रोहिंग्या, बांग्लादेशी और फर्जी मतदाता हटाए जाते हैं और कितने शरणार्थी मतदाता प्रभावित होते हैं। शरणार्थियों को बांग्लादेश वापस नहीं भेजा जाएगा। नागरिकता मिलने के बाद वे फिर से वैध मतदाता बन जाएंगे।"

सबसे ज्यादा नुकसान मतुआ शरणार्थियों को होगा-ममता बाला
हालांकि उनकी टिप्पणी पर तृणमूल कांग्रेस सांसद और मतुआ नेता ममता बाला ठाकुर ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की और चेतावनी दी कि एसआईआर प्रक्रिया भाजपा पर ही भारी पड़ सकती है। शांतनु ठाकुर की मौसी ममता बाला ठाकुर ने मीडिया से कहा, "एसआईआर से सबसे ज्यादा नुकसान मतुआ शरणार्थियों को होगा। जो लोग भाजपा को वोट देंगे, उनके नाम मतदाता सूची से हट जाएंगे। टीएमसी पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा, बल्कि हमारी सीटें बढ़ेंगी।" 

उन्होंने भाजपा नेतृत्व पर नागरिकता और मतदाता पंजीकरण को लेकर लोगों को गुमराह करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "राज्य भाजपा नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री पहले यह तय करें कि वे वास्तव में क्या चाहते हैं। उन्होंने लोगों, खासकर शरणार्थियों को पूरी तरह से भ्रमित कर दिया है।"

एसआईआर बना बंगाल में राजनीतिक विवाद का बड़ा मुद्दा
बता दें कि संभावित एसआईआर पश्चिम बंगाल में एक राजनीतिक विवाद का मुद्दा बन गया है, जहां सत्तारूढ़ टीएमसी चुनाव आयोग पर 2026 के विधानसभा चुनावों से पहले असली मतदाताओं के नाम हटाने के लिए भाजपा के प्रभाव में काम करने का आरोप लगा रही है, जबकि भाजपा का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य अवैध और फर्जी नामं को मतदाता सूची से हटाना है। गौरतलब है कि मतुआ समुदाय, जिसमें बांग्लादेश से आए हिंदू शरणार्थियों का एक बड़ा वर्ग शामिल है, उत्तर 24 परगना और नादिया जिलों में अहम चुनावी प्रभाव रखता है और भाजपा और टीएमसी दोनों के लिए एक प्रमुख वोट बैंक के रूप में उभरा है।
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