केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल नौ से 11 जनवरी तक न्यूयाॅर्क व वाशिंगटन के दौरे पर रहेंगे। अमेरिका की यात्रा के पहले चरण में गोयल बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) से मुलाकात करेंगे। वह कारोबारी दिग्गजों के साथ बैठक करेंगे और न्यूयार्क स्थित उद्योगों का दौरा करेंगे।
उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 11 जनवरी को वाशिंगटन में 13वें व्यापार नीति फोरम (टीपीएफ) की बैठक में हिस्सा लेंगे। प्रतिनिधिमंडल स्तरीय बैठक से पहले वह अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि राजदूत कैथरीन ताई के साथ विमर्श करेंगे। पीयूष गोयल वाशिंगटन में अमेरिकी वाणिज्य मंत्री जीना रायमोंडो के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे। कुछ उद्योगपतियों के साथ भी उनकी परस्पर बातचीत होगी।
टीपीएफ व्यापार के क्षेत्र में दो देशों के बीच निरंतर सहयोग और व्यापार व निवेश संबंधों को आगे बढ़ाने का एक मंच है। भारत और अमेरिका इस बैठक में व्यापार के मुद्दों पर प्रगति करने को लेकर आश्वस्त हैं। टीपीएफ की अध्यक्षता भारत की ओर से वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री और अमरीका की ओर से यूएसटीआर द्वारा की जाती है। 12वीं टीपीएफ बैठक 23 नवंबर 2021 को नई दिल्ली में आयोजित हुई थी।
अब ज्यादा लोग भर रहे टैक्स...
इससे पहले, एक कार्यक्रम में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सरकार ने आठ वर्षों में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) सहित जो भी आर्थिक सुधार किए, उसने अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित किया है। इसका असर जीएसटी संग्रह पर भी दिखा है। उन्होंने कहा कि भारत अब एक अधिक पारदर्शी अर्थव्यवस्था है। लोगों में कर भुगतान की आदत हो रही है।
गोयल ने कहा, पिछले आठ वर्षों में हुए कई संरचनात्मक परिवर्तनों का अर्थव्यवस्था के अगले 25 वर्षों में आगे बढ़ने के तरीके पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा है। हम भारत को दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में देखने की उम्मीद करते हैं। व्हार्टन इंडिया इकनॉमिक फोरम में कहा, दिवालिया एवं ऋणशोधन अक्षमता कानून (आईबीसी) भी महत्वपूर्ण सुधार था। इससे बैंकिंग प्रणाली को मजूबत बनाने में मदद मिली है। एजेंसी
पीएलआई-आत्मनिर्भर भारत महत्वपूर्ण पहल
गोयल ने कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर, चिप व घरेलू विनिर्माण अर्थव्यवस्था के लिए कुछ प्राथमिकता वाले क्षेत्र हैं। प्रधानमंत्री का ध्यान भारत में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने पर है। आत्मनिर्भर भारत योजना महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा, सरकार ने भारतीय निर्माताओं को विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने, निवेश और निर्यात बढ़ाने पर फोकस किया है। भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनाने और आयात पर निर्भरता घटाने के लिए उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना शुरू की।