बता दें कि यह मंत्रालय इससे पहले एनडीए के सहयोगी अकाली दल के पास था और हरसिमरत कौर बादल मंत्री थीं, लेकिन कृषि बिलों को लेकर विरोध जताते हुए उन्होंने 17 सितंबर को मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। हरसिमरत कौर बादल ने केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने के बाद कहा था कि उनकी पार्टी किसी भी किसान विरोधी फैसले में सहयोगी नहीं बन सकती। उन्होंने कहा कि मेरा फैसला शिरोमणि अकाली दल की उस पवित्र सोच, विरासत और समर्पण की भावना का प्रतीक है, जिसके अनुसार अकाली दल किसानों के हित की लड़ाई में किसी भी हद तक जाने से पीछे नहीं हटा है और न हटेगा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे अपने चार पेज के इस्तीफे में हरसिमरत बादल ने कहा था कि 'उन्हें इस बात पर बेहद गर्व है कि आज वह अकाली दल के गौरवमयी विरासत को आगे बढ़ाने में अपना रोल निभा रही हैं। उन्होंने कहा कि मुझे इस बात पर गर्व है कि हमारे किसान हमेशा ही सबसे ज्यादा उम्मीद शिरोमणि अकाली दल पर करते आए हैं और पार्टी उनकी उम्मीदों एवं विश्वास पर खरी उतरी है।'