महाराष्ट्र के धुले जिले में सत्र अदालत ने मंगलवार को केंद्रीय मंत्री नारायण राणे को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक और नफरत वाले बयान देने के मामले में अग्रिम जमानत दे दी। यह मामला पिछले साल अगस्त का है।
मुख्य जिला न्यायाधीश आरएच मोहम्मद ने राणे की गिरफ्तारी से पूर्व जमानत के आवेदन को 15,000 रुपये के मुचलके पर स्वीकार कर लिया। हालांकि, अदालत ने राणे को निर्देश दिया है कि पुलिस की ओर से जब भी उन्हें बुलाया जाएगा तो उन्हें पेश होना होगा।
धुले शहर पुलिस ने एक शिवसेना कार्यकर्ता की ओर से दाखिल शिकायत के आधार पर राणे के खिलाफ आईपीसी (भारतीय दंड संहिता) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था। शिकायत करे अनुसार राणे ने अगस्त 2021 में रायगढ़ जिले के महाड में सीएम ठाकरे के खिलाफ अपमानजनक बयान दिया था।
केंद्रीय मंत्री की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अनिकेत निकम ने कहा कि आईपीसी की धारा 153(बी) के तहत अपराध नारायण राणे के खिलाफ नहीं है क्योंकि उनका बयान किसी विशेष समूह अथवा वर्ग के खिलाफ कानून को अपने हाथों में लेने के लिए नहीं था।
निकम ने यह दलील भी दी कि राज्य सरकार ने राणे के खिलाफ एक ही घटना के लिए अलग-अलग स्थानों पर आईपीसी की अलग-अलग धाराओं के तहत कई एफआईआर दर्ज करवाई हैं।
नारायण राणे ने उद्धव ठाकरे को भारत की आजादी का वर्ष न मालूम होने पर थप्पड़ मारने की बात कही थी। इसे लेकर उन्हें 24 अगस्त को रत्नागिरि जिले में गिरफ्तार किया गया था।