केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर हमला साधा। उन्होंने सीएम स्टालिन पर 'पूरी तरह भ्रष्टाचार में डूबे हुए' होने का आरोप लगाया। रेड्डी ने दावा किया कि तमिलनाडु के लोग 2026 के चुनावों से पहले स्टालिन के खिलाफ हैं। केंद्रीय मंत्री की यह टिप्पणी तब आई है जब स्टालिन ने चेन्नई में परिसीमन पर संयुक्त कार्रवाई समिति (जेएसी) की पहली बैठक की मेजबानी की।
किशन रेड्डी ने कहा कि भाजपा परिसीमन और भाषा सहित सभी मामलों सभी नागरिकों के लिए न्याय सुनिश्चित करेगी। उन्होंने कहा तमिलनाडु के मुख्यमंत्री और तमिलनाडु की कुछ पार्टियों ने आज चेन्नई में एक बैठक की है। चाहे वह कांग्रेस पार्टी हो, डीएमके हो या बीआरएस। उन्होंने पूछा कि क्या केंद्र सरकार ने परिसीमन पर कोई चर्चा की है। उनका कहना था कि स्टालिन 4.5 साल तक शासन करते हुए भ्रष्टाचार में डूबे रहे हैं और वह अपनी मुश्किलों से बचने के लिए भाजपा पर आरोप लगा रहे हैं। आगामी चुनावों में तमिलनाडु की जनता उनके खिलाफ है।
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जेएसी की बैठक में ये रहे मौजूद
जेएसी की बैठक में तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान, केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, ओडिशा कांग्रेस अध्यक्ष भक्त चरण दास और बीजू जनता दल के नेता संजय कुमार दास वर्मा सहित कई अन्य नेताओं ने भाग लिया।
निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन पर अगली बैठक हैदराबाद में होगी
मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन पर अगली बैठक हैदराबाद में होगी। इससे पहले दिन में, जेएसी की बैठक में सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें कहा गया कि केंद्र द्वारा किए जाने वाला कोई भी परिसीमन अभ्यास 'पारदर्शी' और सभी हितधारकों से चर्चा के बाद किया जाना चाहिए।
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जेएसी ने परिसीमन में पारदर्शिता की कमी के बारे में जताई चिंता
डीएमके सांसद कनिजमोझी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि जेएसी ने परिसीमन में पारदर्शिता की कमी के बारे में चिंता जताई। उन्होंने बताया कि यह पहल लोकतंत्र को बेहतर बनाने के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान जेएसी ने सर्वसम्मति से संकल्प लिया कि हमारे लोकतंत्र की सामग्री या चरित्र को बेहतर बनाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा किए गए किसी भी परिसीमन अभ्यास को पारदर्शी तरीके से किया जाना चाहिए ताकि सभी राज्यों के राजनीतिक दल, राज्य सरकारें और अन्य हितधारक विचार-विमर्श, चर्चा और योगदान कर सकें।
अगले 25 वर्षों के लिए बढ़नी चाहिए संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों पर रोक
उन्होंने कहा कि 42वें, 84वें और 87वें संविधान संशोधन के पीछे विधायी मंशा उन राज्यों को संरक्षण और प्रोत्साहन देना है, जिन्होंने जनसंख्या नियंत्रण उपायों को प्रभावी ढंग से लागू किया है। उन्होंने कहा कि 1971 की जनगणना के आधार पर संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों पर रोक को अगले 25 वर्षों के लिए बढ़ाया जाना चाहिए।
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