केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, अगर देश में 'टिकाऊ पर्यटन' की राह तैयार करनी है तो उसके लिए 'सफलता की कहानियां' बनानी होंगी। पर्यावरण अनुकूल पर्यटन पर बनने वाली सफलता की कहानियों को लंबे समय तक दोहराने की आवश्यकता होगी। पर्यटन के क्षेत्र में सभी हितधारकों को सही मायने में 'टिकाऊ पर्यटन' का मकसद हासिल करने के लिए सामूहिक रूप से काम करना पड़ेगा। विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद की अध्यक्ष एवं सीईओ जूलिया सिम्पसन ने अपने वीडियो संदेश में कहा, भारत में यात्रा एवं पर्यटन असाधारण अवसर प्रदान करता है। इस क्षेत्र में अगले दस वर्षों में 7 प्रतिशत की वृद्धि होने की उम्मीद है।
मेकमायट्रिप फाउंडेशन और वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल इंडिया इनिशिएटिव (डब्ल्यूटीटीसीआईआई) द्वारा आयोजित इंडिया ट्रैवल एंड टूरिज्म सस्टेनेबिलिटी कॉन्क्लेव का पहला संस्करण बुधवार को दिल्ली में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय पर्यटन मंत्री ने गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, हमें ऐसे और भी प्लेटफॉर्म्स शुरु करने की आवश्यकता है, जो पर्यटन क्षेत्र के सभी पक्षों को एक साथ लाकर सतत विकास पर सार्थक संवाद की दिशा में काम करें। मेकमायट्रिप फाउंडेशन और डब्ल्यूटीटीसीआईआई इस दिशा में नेतृत्व कर रहे हैं। इस तरह के कार्यक्रम आगामी वर्षों में इस क्षेत्र की दिशा तय करने में मदद करेंगे।
विश्व यात्रा एवं पर्यटन परिषद की अध्यक्ष एवं सीईओ जूलिया सिम्पसन ने कहा, भारतीय अर्थव्यवस्था का 7 प्रतिशत हिस्सा, यात्रा एवं पर्यटन पर निर्भर करता है। वैश्विक आंकड़ा 10 प्रतिशत है। जिस तरह से भारत इस समय विकास कर रहा है, उससे जल्द ही इस तरह के आंकड़े तक पहुंच जाएंगे। यह एक असाधारण विकास का अवसर है। भारत के ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का लगभग 4.8 प्रतिशत हिस्सा, यात्रा और पर्यटन क्षेत्र से आता है। भारत अपनी कार्बन तीव्रता को वैश्विक औसत के मुकाबले कहीं अधिक तेजी से कम कर रहा है। यह 13 प्रतिशत कम हो रहा है। इस कार्यक्रम में सरकार, उद्योग और सामाजिक क्षेत्र से 30 से अधिक प्रतिष्ठित प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
इस दौरान हॉस्पिटैलिटी, एविएशन, मोबिलिटी, क्लाइमेट एक्शन और रिस्पॉन्सिबल टूरिज्म जैसे पांच प्रमुख क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा की गई। कार्यक्रम में 'सस्टेनेबल हॉस्पिटैलिटी' हैंडबुक लॉन्च की गई। यह हैंडबुक होटलों को ऊर्जा, जल, कचरा प्रबंधन और समुदाय पर प्रभाव जैसे क्षेत्रों में पर्यावरण के अनुकूल कार्यप्रणाली अपनाने के लिए एक व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान करती है। वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल (डब्ल्यूटीटीसी), इंडिया चैप्टर के चेयरमैन और मेकमायट्रिप फाउंडेशन के मैनेजिंग ट्रस्टी दीप कालरा ने कहा, जब हम भारत के यात्रा और पर्यटन क्षेत्र के भविष्य के बारे में सोचते हैं, तो यह स्पष्ट है कि सस्टेनेबिलिटी के मुद्दे को अब हाशिए पर नहीं रखा जा सकता। यह हमारे विकास के दृष्टिकोण के मूल में शामिल होना चाहिए। इसके लिए नीति, उद्योग और जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता है।
होटल एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष केबी कछरू ने कहा, यह देखकर हौसला बढ़ा है कि इस कॉन्क्लेव में इतने प्रभावशाली लोगों ने हिस्सा लिया। चर्चा सिर्फ इस पर नहीं हुई कि सतत विकास क्यों ज़रूरी है, बल्कि इस पर भी विचार हुआ कि हम इसे अमल में कैसे ला सकते हैं। सस्टेनेबल हॉस्पिटैलिटी हैंडबुक इसी प्रयास में सहयोग देने के लिए बनाई गई है। यह हैंडबुक छोटे-बड़े सभी होटलों के लिए उपयोगी है। हमें उम्मीद है कि इससे पूरे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में जागरूक प्रथाओं को अपनाने की प्रेरणा मिलेगी।
दिनभर की चर्चा में कई महत्वपूर्ण मुद्दों जैसे विमानन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन कम करने से लेकर सार्वजनिक परिवहन का विद्युतीकरण, होटलों में संसाधनों के प्रयोग में कमी और अधिक लचीली स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं का निर्माण करने तक का समावेश था। कॉन्क्लेव में मजबूत भागीदारी ने इस बात को और ज्यादा स्पष्ट कर दिया कि अब सस्टेनेबिलिटी कोई हाशिए की चर्चा नहीं रही, बल्कि यह भारतीय यात्रा और पर्यटन क्षेत्र के विकास की दिशा तय करने वाली एक अहम प्राथमिकता बन चुकी है। इस आयोजन ने व्यावहारिक उपकरणों को शुरू करने और रोडमैप तैयार करने की दिशा में एक ठोस कदम उठाया है, जहां उद्देश्य और क्रियान्वयन को आपस में जोड़ा जा रहा है।