केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि भारतीय तटरेखा का देश के लिए खासा रणनीतिक, आर्थिक और सामाजिक महत्व है। 7,500 किलोमीटर लंबाई वाली यह दुनिया में सातवीं सबसे लंबी तट रेखा है। यहां पर देश की 20 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को जलवायु परिवर्तन को लेकर तटीय लोगों से खास अपील की। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के बढ़ते खतरों के बीच तटीय क्षेत्रों में रहने वाले समुदायों में लचीलेपन को विकसित करने की जरूरत है। वे भुवनेश्वर में पहले ‘भारत में सतत तटीय प्रबंधन पर राष्ट्रीय सम्मेलन’ को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान भूपेंद्र यादव ने कहा कि तटवर्ती क्षेत्रों में पारिस्थितिकी तंत्र की एक बड़ी विविधता है, जो पौधों और जानवरों की 17,000 से अधिक प्रजातियों का समर्थन करती है।
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केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारतीय तटरेखा का देश के लिए खासा रणनीतिक, आर्थिक और सामाजिक महत्व है। 7,500 किलोमीटर लंबाई वाली यह दुनिया में सातवीं सबसे लंबी तट रेखा है और यहां पर देश की 20 प्रतिशत जनसंख्या निवास करती है। चार में तीन मेट्रोपोलिटन शहर इसके तट पर स्थित हैं।
केंद्रीय मंत्री ने ट्वीट किया कि समुद्री पारिस्थितिक तंत्र को विशेष रूप से जलवायु परिवर्तन, प्राकृतिक आपदाओं, समुद्र के अम्लीकरण, समुद्र के स्तर में वृद्धि से खतरा है। उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा कि भू-क्षरण को जब तक रोका नहीं जाता है, यह तटीय आबादी की आजीविका, स्वास्थ्य और कल्याण को प्रभावित करेगा व भारत के सतत आर्थिक विकास को प्रभावित करेगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार इन प्रवृत्तियों को पलटने के लिए प्रतिबद्ध है।
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इससे पहले केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 31 अगस्त को कहा था कि भारत वैश्विक उत्सर्जन के लिए पारंपरिक रूप से जिम्मेदार नहीं होने के बावजूद समस्या का समाधान करने का इरादा दिखा रहा है। यादव ने पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन के मामलों पर चर्चा के लिए इंडोनेशिया के बाली में जी20 देशों की मंत्री स्तरीय बैठक में कहा था कि जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वित्तीय मदद का वादा एक मृगतृष्णा बना हुआ है और इसकी मौजूदा गति एवं पैमाना वैश्विक महत्वाकांक्षा से मेल नहीं खाता।