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CRPF की युवा प्रशिक्षु अधिकारी ने पूछा सवाल तो गृह सचिव और डीजी ने इस अंदाज में दिया जवाब

Sat, 07 Mar 2020 04:24 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • गृह सचिव अजय भल्ला बोले, भारत के लोगों का सीआरपीएफ पर बहुत भरोसा
  • डीजी महेश्वरी बोले, ज्यादा जिम्मेदारी के लिए चाहिए अनुभव के साथ उम्र
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Union Home Secretary Ajay Bhalla at CRPF HQ - फोटो : Social Media
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विस्तार
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केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला शुक्रवार को सीजीओ स्थित सीआरपीएफ मुख्यालय पहुंचे। मौका था सीआरपीएफ के 51वें बैच के डीएजीओ-सीधे नियुक्त राजपत्रित अधिकारियों को संबोधित करने का। भल्ला ने युवा प्रशिक्षु अधिकारियों के साथ बातचीत की। कुछ उनकी सुनी तो कुछ अपनी कही। गृह सचिव ने कहा, अब आप प्रश्न पूछ सकते हैं। कोई नहीं बोला, सब चुप।

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भल्ला तुरंत समझ गए कि प्रशिक्षु अधिकारियों के न बोलने की क्या वजह है। उन्होंने कहा, आप ये समझ लें कि यहां डीजी नहीं बैठे हैं। तब कुछ प्रशिक्षु अधिकारियों ने सवाल पूछे। एक महिला अधिकारी ने कुछ ऐसा सवाल पूछा कि गृह सचिव के साथ डीजी एपी महेश्वरी भी जवाब देने के लिए बीच में बोल पड़े।

प्रशिक्षु अधिकारियों से कही ये बात

दरअसल, उस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह सचिव अजय भल्ला, डीजी सीआरपीएफ डॉ. एपी महेश्वरी, एक स्पेशल डीजी, दो एडीजी और सात आईजी मौजूद थे। अजय भल्ला ने कहा, भारत के लोगों का सीआरपीएफ पर बहुत भरोसा है। यही वजह है कि राज्यों में गंभीर कानून व्यवस्था को संभालने के लिए इसी फोर्स को भेजा जाता है। राज्यों की ओर से मांग भी इसी फोर्स के लिए आती है।

सीआरपीएफ बिना किसी भेदभाव और पारदर्शिता से काम करती है। लोगों की उम्मीदों पर यह बल सदैव खरा उतरा है। बल के अफसरों की आकांक्षा है कि वे आगे बढ़ें। बड़े पद पर पहुंचें। मैं यह भी जानता हूं कि आजकल ज्यादा अधिकारी इस फोर्स में नहीं आना चाहते। इसे आकर्षक बनाने के लिए सरकार कुछ कर रही है। हर किसी को कुछ आश्वासन मिले कि वह इस पद तक पहुंचेगा।

आखिर डीजी को क्यों बीच में बोलना पड़ा

गृह सचिव ने अपनी बात कहने के बाद युवा प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा, अब आप सवाल पूछ सकते हैं। सब चुप रहे तो गृह सचिव समझ गए कि माजरा क्या है। युवा प्रशिक्षु अपने डीजी के सामने बोलने से हिचकिचा रहे थे। भल्ला ने कहा, आप ये समझें कि डीजी यहां नहीं बैठे हैं। इसके बाद नेटग्रिड और तकनीक से जुड़े कुछ सवाल बाहर आए।

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एक महिला अधिकारी ने पूछा कि क्या आपको नहीं लगता कि यहां आने वाले युवा अफसरों को यदि अधिक जिम्मेदारी मिलती है तो इससे बल की प्रगति होगी। वहां बैठे कई आईपीएस अधिकारियों को यह सवाल कुछ ठीक नहीं लगा। गृह सचिव बोले, हम फोर्स की रिस्ट्रक्चरिंग कर रहे हैं। कुछ अच्छा होगा।

इसी बीच डीजी महेश्वरी बोले, इसके लिए अनुभव होना चाहिए। उसके साथ उम्र भी जरूरी है। वहां बैठे कॉडर के कई अफसरों को नागवार गुजरी। चूंकि वे 35 साल की नौकरी करने के बाद भी जिम्मेदारी के पद जैसे आईजी या एडीजी रैंक तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

चुभन दे गया सवाल

विदित है कि सभी अर्धसैनिक बल अपने हितों के लिए केंद्र सरकार से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का दरवाजा खटखटा चुके हैं, लेकिन अभी उन्हें कोई खास राहत नहीं मिली है। एनएफएफयू और ओजीएएस जैसे मामले लंबे समय से चल रहे हैं। अब एनएफएफयू का कुछ हल हुआ है तो ओजीएएस अटका है। नए सर्विस रूल नहीं बन रहे हैं।

नतीजा, कॉडर अधिकारियों को समय पर पदोन्नति नहीं मिलती। सीआरपीएफ के पूर्व आईजी वीपीएस पवार कहते हैं कि बल के कॉडर अधिकारियों के साथ दिखावा हो रहा है। कहीं कोई पारदर्शिता नहीं है। सभी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। केंद्र सरकार कुछ भी साफ साफ नहीं बता रही है।

वहीं एक दूसरे कॉडर अधिकारी का आरोप था कि आईपीएस अधिकारी बल में आला पदों पर कब्जा जमाए बैठे हैं। वे कॉडर अफसरों को जिम्मेदारी देने से कतराते हैं। झारखंड कॉडर के आईपीएस अधिकारी संजय लाटकर को वहीं पर सीआरपीएफ में तीन चार साल तक पोस्टिंग दे दी जाती है।

सवाल उठता है कि ऐसे में पारदर्शिता कैसे आएगी। डीएस चौहान, एचएस सिद्धू और नलिन प्रभात जैसे कई आईपीएस हैं, जिनकी कमान में बल पर बड़े नक्सली हमले हुए हैं। उक्त अधिकारी का दावा है कि कॉडर अधिकारी जो सारी जिंदगी ऑपरेशन में गुजार देता है, उनकी कमान में ऐसी घटनाओं की संख्या बहुत कम है।

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