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लॉकडाउन 2.0 में शाह को क्यों दिखानी पड़ी ताकत, कोरोना से जंग को कमजोर बना रही थी अलग राह

Thu, 23 Apr 2020 09:41 PM IST
गौरव पाण्डेय डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जानलेवा वैश्विक महामारी कोविड-19 से जंग में जुटे डॉक्टरों, नर्स और मेडिकल स्टाफ पर हमलों और उनसे अभद्रता की खबरें लगातार सामने आने के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने अध्यादेश लाकर इनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की कोशिश की है।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (फाइल फोटो) - फोटो : पीटीआई
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विस्तार
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लॉकडाउन 2.0 में अध्यादेश लाकर अपनी ताकत दिखानी पड़ी। उनके मंत्रालय ने एक बार नहीं, कई दफा राज्यों को एडवायजरी भेजकर यह कहा था कि वे कोरोना से जंग में जुटे डॉक्टरों, नर्स और मेडिकल स्टाफ की सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करें। एडवायजरी आती रही, मगर स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मार-पिटाई या अभद्रता करने के मामले नहीं थमे। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 24 मार्च, चार अप्रैल और 11 अप्रैल को एडवायजरी दी गई।

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इस बीच कैबिनेट सचिव ने भी आग्रह किया कि स्वास्थ्य कर्मियों के साथ हो रही ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए राज्य कदम उठाएं। इसके बावजूद मेडिकल स्टाफ पर हमले की खबरें आती रही। आईबी ने राज्यों को लेकर जो रिपोर्ट दी, वह उत्साहवर्धक नहीं थी। इन सबके चलते कहीं कोरोना की लड़ाई कमजोर न पड़ जाए, अमित शाह को अपनी ताकत दिखानी पड़ी। नतीजा, केंद्रीय कैबिनेट ने अध्यादेश लाकर चिकित्सा कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रयास किया है।

खुफिया एजेंसी की रिपोर्ट, कोरोना से लड़ाई हो सकती है कमजोर

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आईबी से हर राज्य की रिपोर्ट ली कि स्वास्थ्य कर्मियों पर हमले क्यों नहीं रुक पा रहे हैं, राज्यों के पुलिस बल आगे नहीं आ रहे हैं या उनकी ड्यूटी में कोई बाधा डाल रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस तरह के कई इनपुट सामने आए। ऊपरी आदेश, पुलिस की कम संख्या, दूसरी एजेंसियों का असहयोग और कार्रवाई में ढिलाई, ये सब यह बताने के लिए काफी थे कि समय रहते डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए कठोर कदम नहीं उठाया गया तो कोरोना की लड़ाई कमजोर पड़ सकती है। 

इसके बाद एम्स के डॉक्टरों और आईएमए की चेतावनी ने शाह को परेशान कर दिया। इसमें केंद्र को चेता दिया गया कि अगर स्वास्थ्य कर्मियों को सुरक्षा नहीं मिली तो वे पीछे हट सकते हैं। शाह ने 22 अप्रैल को गृह मंत्रालय के अधिकारियों के साथ बैठक कर तुरंत अध्यादेश का एक ड्राफ्ट तैयार कराया। इसके बाद कैबिनेट की बैठक में इसे मंजूरी दी गई। मेडिकल स्टाफ पर हमला करने के गंभीर मामलों में छह महीने से लेकर सात साल तक की सजा और पांच लाख तक के जुर्माने का प्रावधान कर दिया गया।

उच्चतम न्यायालय के आदेशों ने भी दबाव की तरह काम किया

उच्चतम न्यायालय ने आठ अप्रैल, 2020 को एक आदेश जारी किया था। इसमें कहा गया था कि भारत सरकार, संबंधित राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों के संबंधित पुलिस अधिकारियों को अस्पतालों और हेल्थ कर्मचारियों को आवश्यक सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए। इस आदेश में जहां कोविड-19 के संदिग्ध, पुष्ट रूप से संक्रमित या क्वारंटीन किए गए मरीज हैं, वहां स्वास्थ्य कर्मियों को आवश्यक पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश दिया गया था।

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