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FCRA: गड़बड़ी करने वाले एनजीओ की संपत्ति बेच सकेगी सरकार, इसी सत्र में पेश होगा एफसीआरए संशोधन विधेयक

Wed, 25 Mar 2026 03:31 AM IST
Devesh Tripathi अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।

सार

विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले हर एनजीओ को नामित प्राधिकारी की नियुक्ति करनी होगी। प्राधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि एनजीओ को जिस उद्देश्य से विदेशी चंदा मिला है, उसका खर्च उसी मद में किया जा रहा है या नहीं। प्राधिकार संपत्ति का प्रबंधन और निस्तारण करेगा।
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लोकसभा में विपक्ष का हंगामा - फोटो : ANI
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विस्तार
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सरकार विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (एफसीआरए) पंजीकृत के तहत गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) पर सख्त नियंत्रण करने जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाने और ऐसी संस्थाओं की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सरकार इसी सत्र में एफसीआरए संशोधन विधेयक लाने की तैयारी में है। इसमें प्रावधान है कि विदेशी योगदान जिस मद के लिए मिला हो, उसी मद में खर्च भी हो। अगर कोई एनजीओ गड़बड़ी करता है तो सरकार उसकी संपत्ति को बेच भी सकती है।
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सरकार के वरिष्ठ मंत्री के मुताबिक, देश में एफसीआरए पंजीकृत 16,000 संस्थाएं हर साल 22,000 करोड़ रुपये विदेशी योगदान से प्राप्त करती है। वर्तमान कानून में विदेशी योगदान के उचित उपयोग, प्रबंधन का स्पष्ट प्रावधान नहीं है। ऐसे में विदेशी योगदान से देश की सुरक्षा को आंच पहुंच सकती है। इस पर पूर्ण विराम लगाने के लिए यह विधेयक लाया जा रहा है।

इसमें प्रावधान है कि जिस एनजीओ का एफआरसीए लाइसेंस रद्द या निलंबित हो गया है या नवीनीकरण नहीं किया गया है, उसकी संपत्तियों को सरकार अपने कब्जे में ले सकती है। इसके लिए निर्धारित प्राधिकरण का गठन होगा। इसके माध्यम से सरकार के पास संस्था की विदेशी चंदे से बनाई गई संपत्ति को अपने कब्जे में लेने का या संपत्ति को बेचकर हासिल रकम को भारत संचित कोष में जमा करने का अधिकार होगा। एनजीओ को सरकार की अनुमति के बिना संपत्ति बेचने की इजाजत नहीं होगी।
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नवीनीकरण नहीं तो पंजीकरण स्वत: रद्द
विदेशी चंदा प्राप्त करने वाले हर एनजीओ को नामित प्राधिकारी की नियुक्ति करनी होगी। प्राधिकारी यह सुनिश्चित करेगा कि एनजीओ को जिस उद्देश्य से विदेशी चंदा मिला है, उसका खर्च उसी मद में किया जा रहा है या नहीं। प्राधिकार संपत्ति का प्रबंधन और निस्तारण करेगा। किसी भी कारणवश संस्था का पंजीकरण का नवीनीकरण न होने पर उसे स्वत: समाप्त माना जाएगा। एनजीओ को विदेशी मदद को एक समय सीमा के अंदर संबंधित उद्देश्य के लिए ही खर्च करना होगा।

जांच के लिए सरकार से लेनी होगी अनुमति
एनजीओ के मुख्य पदाधिकारियों में निदेशक, ट्रस्टी, शासी निकाय के सदस्य, हिंदू अविभाजित परिवार के कर्ता शामिल होंगे। एनजीओ की किसी भी गतिविधि के लिए ये सभी व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे। इसके अलावा किसी एनजीओ के खिलाफ विदेशी मदद मामले में हुई अनियमितताओं की आपराधिक जांच के लिए जांच एजेंसियों और राज्यों को केंद्र सरकार से अनिवार्य रूप से पूर्व अनुमति लेनी होगी।

सजा में कमी का प्रावधान
अनधिकृत रूप से विदेशी योगदान करने के मामले में जेल की सजा में कमी का भी प्रावधान किया गया है। वर्तमान में इसके लिए अधिकतम पांच साल की सजा और योगदान राशि से पांच गुना अधिक जुर्माने की व्यवस्था है। इसे घटा कर चार साल करने का प्रावधान है।
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