पालघर जिले के वाधवन गांव में बनने वाला ग्रीनफील्ड बंदरगाह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। महाराष्ट्र के बंदरगाह विकास मंत्री संजय बनसोडे कहते हैं कि वाधवन बंदरगाह से राज्य के आर्थिक विकास को गति मिलेगी और लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा।
केंद्रीय कैबिनेट ने महाराष्ट्र के वाधवन (वाढवण) में 76,200 करोड़ की लागत से देश के सबसे अधिक कंटेनर क्षमता वाले बंदरगाह बनाने की मंजूरी दी है। जिस वाधवन गांव के नाम पर ग्रीनफील्ड बंदरगाह बनाया जाना है उसकी पौराणिक मान्यता है। वाधवन गांव में शंखोदर नामक एक स्थान है जहां की मान्यता यह है कि यहां पर भगवान राम ने वनवास के दौरान अपने पिता राजा दशरथ का तर्पण किया था।
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पालघर जिले के वाधवन गांव में बनने वाला ग्रीनफील्ड बंदरगाह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट है। महाराष्ट्र के बंदरगाह विकास मंत्री संजय बनसोडे कहते हैं कि वाधवन बंदरगाह से राज्य के आर्थिक विकास को गति मिलेगी और लाखों लोगों को रोजगार मिलेगा। वे इसे केंद्र की तरफ से महाराष्ट्र को दिया गया बड़ा उपहार मानते हैं। वहीं, स्थानीय जनता और मछुआरे इसका विरोध कर रहे है। वाधवन बंदरगाह विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष नारायण पाटिल ने केंद्रीय कैबिनेट के फैसले की निंदा की है।
उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि बंदरगाह बनने से मछुआरों का रोजगार चौपट हो जाएगा और मछली के पलने-बढ़ने की जगह गोल्ड बेल्ट नष्ट हो जाएगा। बंदरगाह के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यून (एनजीटी) में हमारी याचिका विचाराधीन है। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने कानून को ताक पर रखकर वाधवन बंदरगाह बनाने की मंजूरी दी है। पाटिल ने कहा कि हमने इसके खिलाफ रविवार को स्थानीय लोगों की सभा बुलाई है जिसमें आगे के आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी।